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राजनीति की भेंट चढ़ी कांशीराम कॉलोनी, बदहाल नालियां और बदहाली में जीने को मजबूर लोग

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प्रयागराज। फाफामऊ स्थित कांशीराम आवास योजना कॉलोनी आज बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रही है, जहां रहने वाले लोगों का कहना है कि वे वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कॉलोनी में जर्जर होते मकान, टूटती दीवारें, सीलन, ओवरफ्लो होती सीवर लाइनें और गंदगी से भरी नालियां लोगों के लिए रोजमर्रा की परेशानी बन चुकी हैं।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही कॉलोनी की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं देता। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद न तो सफाई व्यवस्था में सुधार हुआ और न ही आवासों की मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया।

जर्जर हो चुके हैं आवास

कांशीराम आवास योजना के तहत वर्ष 2008 से 2011 के बीच निर्मित इन मकानों में रहने वाले परिवारों का कहना है कि घरों की दीवारों से लगातार सीमेंट झड़ रहा है। कई जगहों पर दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और छतों की स्थिति भी चिंताजनक हो गई है। निवासियों के अनुसार, बरसात के मौसम में सीलन और रिसाव की समस्या और बढ़ जाती है, जिससे कमरों में बदबू फैल जाती है। एक निवासी ने बताया कि उन्होंने अपने सीमित संसाधनों से कई बार घरों की मरम्मत करवाई, लेकिन मूल निर्माण की खामियों के कारण समस्या लगातार बनी हुई है।

सीवर और नालियों की बदतर हालत

कॉलोनी की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक सीवर व्यवस्था है। कई स्थानों पर सीवर लाइनें जाम हैं और गंदा पानी घरों के आसपास जमा हो रहा है। कुछ निवासियों का आरोप है कि सीवर का पानी उनके बाथरूम और शौचालय तक वापस आने लगा है। नालियों में कीचड़ और कूड़ा जमा होने से गंदगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि नियमित सफाई नहीं होती और सफाई कर्मी भी केवल औपचारिकता निभाकर चले जाते हैं। कई जगहों पर टूटे हुए ढक्कन और खुले सीवर हादसों की आशंका बढ़ा रहे हैं।

पार्क और सार्वजनिक सुविधाएं भी बदहाल

कॉलोनी का पार्क भी उपेक्षा का शिकार दिखाई देता है। पार्क में घास-फूस, कूड़ा-कचरा और गोबर फैला हुआ है। बच्चों के खेलने के लिए विकसित किए गए इस स्थान की देखरेख न होने से यह लगभग उपयोगहीन हो चुका है। इसी प्रकार कॉलोनी में बने ट्यूबवेल भवन की हालत भी जर्जर बताई जा रही है। भवन की दीवारों से प्लास्टर उखड़ चुका है और खिड़कियां टूटी हुई हैं।

निर्माण गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

कुछ निवासियों ने आरोप लगाया कि मकानों के निर्माण के समय कई जरूरी सुविधाएं अधूरी छोड़ दी गई थीं। उनका कहना है कि कई घरों में दरवाजे, खिड़कियां और अन्य बुनियादी व्यवस्थाएं बाद में अपने खर्च पर लगवानी पड़ीं। लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कॉलोनी में आए दिन विवाद और उपद्रव की घटनाएं होती रहती हैं। उनका आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी और निगरानी पर्याप्त नहीं है। कई निवासियों ने क्षेत्र में स्थायी पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग की है।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कार्रवाई की मांग

निवासियों का कहना है कि कॉलोनी के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। लोगों ने नगर निगम, आवास विकास विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से तत्काल सर्वे कराकर जर्जर भवनों की मरम्मत, सीवर और नाली व्यवस्था को दुरुस्त करने तथा नियमित सफाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत और रखरखाव नहीं किया गया, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका सवाल है कि जब शहर स्मार्ट सिटी की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब कांशीराम कॉलोनी जैसे आवासीय क्षेत्रों की बदहाली पर ध्यान कब दिया जाएगा।यह संस्करण समाचार-पत्र की पेशेवर रिपोर्टिंग शैली में तैयार किया गया है, जिसमें आरोपों को निवासियों के कथन के रूप में प्रस्तुत किया गया है और भाषा को संतुलित रखा गया है।

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