देश
नोएडा के ‘शो-विंडो’ में सरकारी स्कूल की बदहाल तस्वीर, बारिश में जलभराव तो बिजली जाते ही अंधेरे में पढ़ते बच्चे
नोएडा। उत्तर प्रदेश को विकास का मॉडल और नोएडा को प्रदेश की शो-विंडो कहा जाता है, लेकिन इसी नोएडा के घड़ी चौखंडी स्थित प्राथमिक विद्यालय की तस्वीरें सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती हैं। बारिश के दौरान स्कूल परिसर और कक्षाओं में पानी भर जाता है। छतों से लगातार लीकेज की शिकायत है। वहीं बिजली चले जाने पर छोटे-छोटे बच्चों को अंधेरे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
बारिश में कक्षाओं तक पहुंच जाता है पानी
विद्यालय की शिक्षिकाओं के मुताबिक बारिश के दौरान स्कूल की कक्षाओं में काफी पानी भर गया था, जिसे बाद में निकलवाया गया। स्कूल की एक शिक्षिका ने बताया कि छत से पानी टपकने और लीकेज की शिकायत लिखित रूप से कई बार अधिकारियों को दी जा चुकी है। पिछले साल भी पत्र दिया गया था और इस साल भी शिकायत की गई, लेकिन समस्या अब तक पूरी तरह दूर नहीं हुई।
304 बच्चों के लिए सिर्फ तीन कमरे
विद्यालय में करीब 304 बच्चे पढ़ते हैं, जबकि स्कूल में पर्याप्त कक्षाओं का अभाव है। शिक्षकों के मुताबिक कई बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। कुछ कमरों में एक से अधिक कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाया जाता है। बाल वाटिका, कक्षा एक और कक्षा दो के बच्चों के लिए भी जगह की कमी बताई गई।
शिक्षिकाओं का कहना है कि गांव में यही एक सरकारी स्कूल है और बच्चों की संख्या अधिक होने के बावजूद भवन में पर्याप्त कमरे नहीं हैं।
बिजली गई तो अंधेरे में बैठ गए बच्चे
स्कूल में बिजली जाने के बाद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती दिखाई दी। कई कमरों में पर्याप्त रोशनी और हवा की व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चे अंधेरे में बैठे नजर आए। इसी दौरान एक बच्ची अपनी पढ़ाई के लिए घर से बैटरी वाला लैंप लेकर पहुंची थी।
यह तस्वीर सरकारी स्कूलों में सुविधाओं के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है जहां एक बच्ची अपने साथ रोशनी का इंतजाम लेकर स्कूल पहुंच रही है, वहीं व्यवस्था के स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है।
स्मार्ट क्लास के दावे, लेकिन खिड़कियों और पंखों की हालत खराब
सरकार की ओर से स्कूलों को स्मार्ट क्लास और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की बात कही जाती है। लेकिन मौके पर कुछ कक्षाओं में रोशनी, हवा और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था तक का अभाव दिखाई देता है। स्कूल के आसपास खड़ी गाड़ियों के कारण भी कक्षाओं में हवा आने में परेशानी होने की शिकायत शिक्षिकाओं ने की।
आंगनबाड़ी भी उसी परिसर में, जगह की भारी कमी
स्कूल परिसर में आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होता है। यहां बच्चों की गतिविधियों के साथ-साथ पोषण आहार और सरकारी योजनाओं से जुड़ी गतिविधियां भी होती हैं। शिक्षिकाओं के अनुसार जगह कम होने के कारण छोटे बच्चों के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है।
बारिश के कारण आंगनबाड़ी में बच्चों की उपस्थिति भी कम बताई गई। एक ही सीमित जगह में बच्चों की पढ़ाई, गतिविधियां और अन्य सरकारी कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
बिजली के तार और खंभे भी चिंता का विषय
स्कूल परिसर में बिजली के तारों और खंभों की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मौके पर तारों की सुरक्षा और बच्चों की पहुंच को लेकर चिंता दिखाई दी। स्कूल प्रबंधन की ओर से बच्चों को बिजली के पोल से दूर रखने के लिए अस्थायी इंतजाम किए गए हैं।
बारिश के मौसम में बिजली के खुले या असुरक्षित हिस्सों के आसपास बच्चों की मौजूदगी किसी बड़े हादसे का खतरा पैदा कर सकती है। ऐसे में स्कूल परिसर की विद्युत व्यवस्था की सुरक्षा जांच और जरूरी सुधार की आवश्यकता है।
सवाल सिर्फ एक स्कूल का नहीं, व्यवस्था का है
घड़ी चौखंडी प्राथमिक विद्यालय की तस्वीरें यह सवाल खड़ा करती हैं कि जब नोएडा जैसे दिल्ली-एनसीआर के विकसित क्षेत्र में सरकारी स्कूल की स्थिति ऐसी हो सकती है, तो दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में बच्चों को किस तरह की सुविधाएं मिल रही होंगी?
बच्चों को 2047 के विकसित भारत की भागीदारी बनाने की बात लगातार कही जाती है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि उन्हें सुरक्षित भवन, पर्याप्त कक्षाएं, बिजली, रोशनी, हवा और बेहतर बुनियादी सुविधाएं भी मिलें। सिर्फ ‘स्मार्ट क्लास’ कह देने से स्कूल स्मार्ट नहीं बनता, उसके लिए जमीन पर व्यवस्था भी स्मार्ट करनी होगी।

You must be logged in to post a comment Login