देश
कोयले की दौलत के नीचे धंसती जिंदगी, धनबाद में छह महीने पहले बनी सड़क धंसी, जमीन से गैस रिसाव और खंडहर बनते घरों के बीच जिंदगी गुजारने को मजबूर लोग
धनबाद। देश के प्रमुख कोयला क्षेत्रों में शामिल धनबाद से हर साल बड़ी मात्रा में कोयला निकलता है, लेकिन इसी धरती के ऊपर रहने वाले लोगों की जिंदगी आज खतरे के साये में है।
धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग का एक हिस्सा करीब छह महीने पहले बनने के बावजूद धंस चुका है। सड़क पर आवागमन रोकने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, लेकिन यह रास्ता स्थानीय लोगों के लिए बेहद जरूरी है। स्कूल जाने वाले बच्चे और रोजमर्रा के काम से निकलने वाले लोग मजबूरी में इसी जोखिम के बीच गुजर रहे हैं।
खतरा सामने, लेकिन जाएं कहां?
इलाके में जगह-जगह लिखा है कि यहां रहना खतरनाक है। इसके बावजूद लोग घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें दूसरी जगह बसाने की बात तो कही गई है, लेकिन वहां रोजगार और जरूरी सुविधाओं की कमी है।
एक महिला ने बताया कि गैस रिसाव के कारण इलाके में तेज गंध रहती है और कई लोगों को परेशानी होती है। एक परिवार ने गैस रिसाव की घटना में अपने सदस्य की मौत का भी दावा किया।
रिहायशी इलाका बना खंडहर
कभी आबाद रहने वाला इलाका आज टूटे मकानों और धंसी जमीन में बदल रहा है। कई घर खाली पड़े हैं और कई परिवार विस्थापन के इंतजार में हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि भूमिगत आग, गैस रिसाव और कथित अवैध खनन के कारण जमीन धंसने की समस्या बढ़ रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
बच्चों का मैदान भी सुरक्षित नहीं
जिस जगह कभी बच्चे खेलते थे, वहां भी जमीन में दरारें और गैस रिसाव की शिकायतें सामने आ रही हैं। बारिश के दौरान गंध बढ़ने की बात स्थानीय लोग कहते हैं।
सवाल यह है कि जब सड़क, घर और खेल का मैदान तक सुरक्षित नहीं है, तो इन परिवारों के बच्चों का भविष्य कितना सुरक्षित है?
विस्थापन चाहिए, लेकिन रोजगार के साथ
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे सुरक्षित जगह जाने के खिलाफ नहीं हैं। उनकी मांग है कि पहले सही सर्वे हो, उचित मुआवजा मिले और नई जगह घर के साथ रोजगार की व्यवस्था भी हो। उनका कहना है कि केवल मकान देने से परिवार नहीं चलता।
विकास की कीमत कौन चुकाएगा?
धनबाद का कोयला देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोग भी खनन बंद करने की मांग नहीं कर रहे, बल्कि उनका सवाल है कि खनन सुरक्षित और नियमों के मुताबिक क्यों नहीं हो सकता? यदि अवैध खनन या भूमिगत खाली हिस्सों की उचित भराई नहीं होने के आरोप सही हैं, तो इसकी जांच जरूरी है।
धनबाद की तस्वीर एक बड़ा सवाल छोड़ती है, जमीन के नीचे से कोयला निकालकर देश का विकास हो रहा है, लेकिन क्या उसी जमीन के ऊपर रहने वाले लोगों की सुरक्षा की कीमत पर?
विकास तभी सार्थक होगा, जब कोयले के साथ-साथ लोगों की जिंदगी, रोजगार और सुरक्षित भविष्य भी सुरक्षित रहे।
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