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18 दिन के अनशन के बाद सड़क पर उतरे पीएचडी स्कॉलर्स, राजभवन मार्च पर अड़े छात्र
पटना में उच्च शिक्षा से जुड़े पीएचडी स्कॉलर्स और अभ्यर्थियों का आंदोलन 18 दिन के अनशन के बाद सड़क पर पहुंच गया। गर्दनीबाग धरना स्थल पर लंबे समय से प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर राजभवन मार्च किया। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिसके बाद कई छात्र बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और वहीं डटे रहे।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नियमित नियुक्तियों की कमी है। उनका दावा है कि पिछले कई वर्षों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती बेहद कम संख्या में निकली, जबकि विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। छात्रों का सवाल है कि जब पद रिक्त हैं तो सरकार नियमित बहाली क्यों नहीं कर रही है।
43 से 55 वर्ष हो उम्र सीमा
पीएचडी स्कॉलर्स की प्रमुख मांगों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में यूजीसी के नियम लागू करना, शोध कार्य और पीएचडी को उचित वेटेज देना तथा उम्र सीमा 43 से बढ़ाकर 55 वर्ष करना शामिल है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अभ्यर्थी वर्षों तक उच्च शिक्षा और शोध में समय लगाते हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में कम उम्र सीमा निर्धारित होने से कई योग्य उम्मीदवार अवसर से बाहर हो सकते हैं।
स्थायी भर्ती और अतिथि शिक्षकों के समायोजन की मांग
प्रदर्शन में बीएन मंडल विश्वविद्यालय समेत कई संस्थानों से आए अतिथि शिक्षकों ने भी हिस्सा लिया। उनकी मांग है कि लंबे समय से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों का समायोजन किया जाए और उन्हें स्थायी नियुक्ति का अवसर मिले। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालयों में खाली पड़े पदों पर नियमित बहाली की मांग भी उठाई। उनका आरोप है कि सरकार स्थायी नियुक्ति के बजाय संविदा या अतिथि शिक्षकों के जरिए काम चला रही है।
18 दिन के अनशन के बाद राजभवन मार्च
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, आंदोलन के संयोजक कुमुद पटेल लंबे समय से भूख हड़ताल पर हैं। छात्रों का आरोप है कि 18 दिनों तक धरना और अनशन के बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों पर गंभीरता से बातचीत नहीं की गई। राजभवन मार्च के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग कर छात्रों को आगे बढ़ने से रोका। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की। उनका कहना है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा।
अब निगाहें सरकार और शिक्षा विभाग पर हैं कि छह सूत्री मांगों को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन उच्च शिक्षा में नियमित नियुक्ति और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया लागू होने तक जारी रहेगा।

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