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आखिर कब मिलेगी छात्रों को बस, किराया भारी पढ़ाई पड़ रही महंगी
इंदौर। ग्रामीण क्षेत्रों से शहर के स्कूलों में पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों के सामने आवागमन बड़ी समस्या बन गया है। सिटी बस की सुविधा और रियायती बस पास की मांग को लेकर छात्र लगातार अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में उन्हें या तो करीब 600 रुपये का मासिक पास लेना पड़ रहा है या फिर रोजाना आने-जाने के लिए अलग किराया देना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल है।
छात्रों के मुताबिक, वे करीब 200 रुपये में बस पास की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि हर महीने 600 रुपये केवल आने-जाने पर खर्च किए जा सकें। कई विद्यार्थी दूर-दराज के गांवों से रोजाना स्कूल आते हैं, जिससे परिवहन खर्च उनके परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बन रहा है।
बस की अनियमितता से पढ़ाई प्रभावित
विद्यार्थियों का कहना है कि उनकी कक्षाएं सुबह करीब 10 बजे शुरू होती हैं और दोपहर बाद खत्म होती हैं। बस समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें आने-जाने में काफी समय लग जाता है। कई बार बस के इंतजार में उनकी कक्षाएं और लेक्चर छूट जाते हैं। छात्रों के अनुसार, आगामी परीक्षाओं के बीच यह समस्या और गंभीर हो गई है। उनका कहना है कि परिवहन की परेशानी के कारण पढ़ाई के लिए मिलने वाला समय कम हो रहा है और इसका असर परीक्षा की तैयारी तथा परिणाम पर पड़ सकता है।
परिवार मजदूरी करता, 600 रुपये देना मुश्किल
छात्रों का कहना है कि उनके परिवारों की आय सीमित है और कई अभिभावक मजदूरी करते हैं। ऐसे में 600 रुपये का मासिक बस पास उनके लिए बड़ी रकम है। विद्यार्थियों का तर्क है कि यही राशि बिजली बिल, लाइब्रेरी या कोचिंग जैसी जरूरी शैक्षणिक जरूरतों में खर्च हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्थानीय स्तर पर पंचायतों की ओर से विद्यार्थियों को मुफ्त या रियायती पास उपलब्ध कराया जा सकता है, तो सरकारी स्तर पर भी छात्रों के लिए सस्ती परिवहन सुविधा क्यों नहीं दी जा सकती।
तीन बार अधिकारियों को दी जानकारी
विद्यार्थियों के मुताबिक, वे इस समस्या को लेकर पहले भी दो बार अधिकारियों के सामने अपनी बात रख चुके हैं। अब तीसरी बार वे अपनी मांग लेकर कलक्ट्रेट पहुंचे हैं। छात्रों का दावा है कि अधिकारियों से बातचीत के बावजूद अभी तक कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया है। उनका कहना है कि अधिकारियों की ओर से 600 रुपये के पास की बात कही गई, जबकि विद्यार्थी इसे वहन करने में असमर्थता जता रहे हैं। छात्रों की मांग है कि उनके लिए करीब 200 रुपये में रियायती पास उपलब्ध कराया जाए और सिटी बस सेवा नियमित रूप से संचालित की जाए।
स्कूल स्तर पर भी लगाए जा रहे हैं दबाव के आरोप
कुछ विद्यार्थियों ने स्कूल प्रबंधन पर आंदोलन में शामिल होने से रोकने और कार्रवाई की चेतावनी देने के आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें स्कूल आने और अपनी बात रखने को लेकर दबाव का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, इसी वजह से पहले की तुलना में कम विद्यार्थी यहां अपनी समस्या रखने पहुंचे हैं। हालांकि, स्कूल प्रबंधन और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष इस मामले में सामने आना बाकी है।
सवाल सिर्फ बस का नहीं, पढ़ाई के अधिकार का भी
विद्यार्थियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए शहर तक पहुंचने का साधन महंगा और अनियमित होगा तो इसका सीधा असर उनकी शिक्षा पर पड़ेगा। उनका कहना है कि सरकार ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने की बात करती है, लेकिन यदि स्कूल पहुंचने के लिए ही पर्याप्त और सस्ती परिवहन व्यवस्था नहीं होगी तो इन योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों तक कैसे पहुंचेगा। अब विद्यार्थियों की मांग है कि प्रशासन सिटी बस सेवा को नियमित करने के साथ रियायती पास की व्यवस्था पर जल्द फैसला करे, ताकि उन्हें रोजाना की परिवहन समस्या से राहत मिले और उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।

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