Connect with us

देश

सियासी जंग की भेंट चढ़े करोड़ों के ‘सपनों के महल’: 16 साल से खंडहर में तब्दील हो रहे 536 फ्लैट

Published

on

WhatsApp Image 2026 05 01 at 13.43.47

मानिकपुर। राजनीति की बिसात पर जब मोहरे सरकारें बदलती हैं, तो नुकसान सिर्फ पार्टी का नहीं, बल्कि आम जनता के उस खून-पसीने की कमाई का होता है जो टैक्स के रूप में सरकार के खजाने में जाती है। इसका सबसे वीभत्स और सटीक उदाहरण मानिकपुर में देखने को मिलता है, जहाँ 536 फ्लैट्स का एक पूरा परिसर आज खंडहर में तब्दील हो चुका है। जिस जगह को गरीबों का आशियाना बनना था, वह आज चोरों का अड्डा और सरकारी लापरवाही का स्मारक बन चुका है।

मायावती ने बोया था बीज, अखिलेश और योगी के दौर में मुरझाई योजना

इस परियोजना की शुरुआत साल 2010 में तत्कालीन बसपा सरकार (मायावती शासनकाल) के दौरान हुई थी। ‘कांशीराम आवास शहरी गरीब योजना’ के तहत इन 536 फ्लैटों का निर्माण इसलिए किया गया था ताकि शहर की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीबों को एक सम्मानजनक जीवन दिया जा सके। 2010 से 2014 के बीच यहाँ तेजी से काम हुआ और बिल्डिंगें बनकर तैयार हो गईं।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, एक समय यहाँ रौनक थी, सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी बनी थी और यहाँ तक कि लोग टहलने और रनिंग के लिए आते थे। लेकिन जैसे ही सत्ता परिवर्तन हुआ और अखिलेश यादव की सरकार आई, आवंटन की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई। उसके बाद भाजपा सरकार आने पर भी स्थिति जस की तस रही।

खिड़की-दरवाजे तक ले उड़े चोर

आज इस परिसर की हालत देखकर कलेजा मुंह को आता है। करोड़ों की लागत से बनी इन इमारतों में अब न दरवाजे बचे हैं और न खिड़कियाँ। चोरों ने यहाँ की लोहे की ग्रिल, बिजली के तार और प्लंबिंग का सामान तक उखाड़ लिया है। हद तो तब हो गई जब यहाँ बनी पुलिस चौकी को भी नहीं बख्शा गया; चोर उसके भी दरवाजे-खिड़कियाँ उड़ा ले गए।

विकास की छवि पर भारी ‘सियासी श्रेय’ की राजनीति

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारें सिर्फ नए काम गिनाने में दिलचस्पी रखती हैं क्योंकि नए प्रोजेक्ट्स में ‘घोटालों’ और ‘कमीशन’ की गुंजाइश ज्यादा होती है। एक स्थानीय नागरिक ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, सरकारें नया काम इसलिए शुरू करती हैं ताकि पैसा कमा सकें। पुरानी बनी-बनाई इमारतों को इसलिए छोड़ दिया गया क्योंकि इसका श्रेय पिछली सरकार को जाता। अगर वर्तमान सरकार चाहती तो आज गरीब यहाँ रह रहे होते, लेकिन उन्हें उजाड़ कर छोड़ दिया गया।

‘जहाँ झुग्गी वहीं मकान’ के दावों पर सवाल

वर्तमान में सरकार ‘जहाँ झुग्गी वहीं मकान’ और ‘पीएम आवास योजना’ के बड़े-बड़े दावे कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि जब पहले से ही 536 फ्लैट बनकर तैयार हैं, तो सरकार नए सिरे से पैसा क्यों बहा रही है? क्या 2047 के विकसित भारत का सपना इन खंडहरों के ऊपर खड़ा होगा?

कुल फ्लैट: 536
योजना का नाम: कांशीराम आवास शहरी गरीब योजना (2010)
वर्तमान स्थिति: खंडहर, बिजली-पानी का अभाव, सुरक्षा नदारद।
जनता का सवाल: क्या अगली सरकार आने पर वर्तमान योजनाओं का भी यही हश्र होगा?
सरकारें बदलती रहीं, बजट पास होते रहे, लेकिन उन गरीबों की किस्मत नहीं बदली जिनके नाम पर यह करोड़ों रुपया खर्च किया गया था। मानिकपुर के ये ‘भूतिया’ फ्लैट आज उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक ईर्ष्या की गवाही दे रहे हैं।

Continue Reading
Click to comment

You must be logged in to post a comment Login

Leave a Reply

Advertisement

Trending

Copyright © 2025 Batangarh. Designed by ❤️ TrafficRaid.com