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शिक्षा के मंदिर में ‘महखाना’: स्कूल परिसर में शराब की बोतलें, टूटे कांच और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा
चित्तौड़गढ़। जिस विद्यालय में बच्चों को शिक्षा, संस्कार और अनुशासन का पाठ पढ़ाया जाता है, वहां स्कूल समय के बाद कथित तौर पर शराबियों का जमावड़ा लगने की शिकायत सामने आई है। चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार तहसील क्षेत्र के कोठौली स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में शराब की खाली बोतलें, टूटे कांच, सिगरेट के पैकेट और अन्य कचरा मिलने का दावा किया गया है। विद्यालय प्रबंधन और विद्यार्थियों का कहना है कि शाम के समय असामाजिक तत्व परिसर में प्रवेश कर शराब पीते हैं और जाते समय गंदगी के साथ सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
सुबह बच्चे आते हैं तो सफाई करनी पड़ती
विद्यालय के कार्यवाहक प्रधानाध्यापक के अनुसार स्कूल समय समाप्त होने के बाद कुछ लोग परिसर में आकर शराब पीते हैं। विद्यालय में पानी की सुविधा होने के कारण बरामदों और आसपास के हिस्सों में बैठने की बात भी सामने आई है। उनका कहना है कि शराब की बोतलों के साथ सिगरेट के पैकेट और जंक फूड का कचरा भी परिसर में छोड़ दिया जाता है। सुबह विद्यालय पहुंचने पर बच्चों और कर्मचारियों को इनकी सफाई करनी पड़ती है।
टूटे कांच से बच्चों को चोट का खतरा
विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों ने भी परिसर की स्थिति को लेकर चिंता जताई। विद्यार्थियों के मुताबिक कई जगह शराब की कांच की बोतलें तोड़कर छोड़ दी जाती हैं। उनका कहना है कि टूटे कांच के कारण खेलते और परिसर में घूमते समय चोट लगने का खतरा बना रहता है।
एक छात्र ने बताया कि कई बार कक्षाओं के बाहर थूकने और गंदगी करने जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल परिसर में इस तरह की गतिविधियां उनके लिए परेशानी और असुरक्षा का कारण बन रही हैं।
शराब की दुकान हटाने के लिए एसपी को दिया प्रार्थना पत्र
विद्यालय प्रबंधन के मुताबिक स्कूल से कुछ ही दूरी पर शराब की दुकान संचालित है। इसी को देखते हुए विद्यालय की ओर से 3 जुलाई को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर शराब की दुकान हटाने की मांग की गई थी। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि शिकायत दिए जाने के बावजूद अभी तक इस संबंध में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। हालांकि विद्यालय प्रबंधन यह भी मानता है कि शराब पीने वाला व्यक्ति कहीं और से भी शराब लेकर आ सकता है, लेकिन स्कूल के पास शराब की दुकान होने से समस्या बढ़ने की आशंका है।
स्टेडियम के पीछे बनी जगहों में भी जमावड़े का आरोप
विद्यालय परिसर के पीछे स्टेडियम के आसपास बनी कुछ जगहों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि इन स्थानों पर भी कुछ लोग बैठकर शराब पीते हैं। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि स्कूल की खिड़कियां और अन्य सामान भी क्षतिग्रस्त किए गए हैं। परिसर में मल-मूत्र करने और गंदगी फैलाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इससे विद्यालय का वातावरण प्रभावित होने के साथ बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
विद्यालय के पीछे कथित अतिक्रमण, कुत्तों से भी परेशानी
विद्यालय प्रबंधन ने स्कूल के पीछे कुछ परिवारों के रहने और उनके द्वारा विद्यालय परिसर में दखल दिए जाने का आरोप लगाया है। प्रबंधन के अनुसार वहां रहने वाले लोगों के पालतू कुत्ते भी विद्यालय परिसर में आ जाते हैं और कुछ बच्चों को उनके द्वारा काटे जाने की घटनाएं सामने आई हैं। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि इस समस्या को लेकर भी संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
कई बार शिकायत की, फिर भी समस्या बरकरार
ग्रामीणों और विद्यालय परिवार का कहना है कि स्कूल परिसर में शराब की बोतलें मिलने की समस्या नई नहीं है। ग्रामीण स्तर पर भी कई बार इस मुद्दे को उठाया गया। एक अवसर पर बड़ी संख्या में शराब की खाली बोतलें एकत्र कर ग्रामीणों के सामने समस्या को उजागर किए जाने का दावा भी किया गया। इसके बावजूद विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया।
पैसा स्वीकृत, लेकिन काम धरातल पर शून्य!
विद्यालय की समस्याएं केवल शराब और असामाजिक तत्वों तक सीमित नहीं हैं। विद्यालय में मुख्यमंत्री जनसहभागिता योजना के तहत स्वीकृत राशि के बावजूद निर्माण और मरम्मत कार्य लंबित होने का मामला भी सामने आया है। विद्यालय से जुड़े लोगों के अनुसार योजना के तहत करीब ₹70,750 की राशि जमा कराई गई, जिसके बाद लगभग ₹1.80 लाख का कार्य स्वीकृत होने की जानकारी दी गई। लेकिन विद्यालय प्रबंधन का दावा है कि स्वीकृति के करीब 10-12 महीने बीत जाने के बाद भी धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ।
खिड़कियां टूटीं, वायर गेज खराब, सुरक्षा पर सवाल
विद्यालय के पीछे बने कमरों की कई खिड़कियां टूटी हुई हैं। वायर गेज खराब होने के कारण जानवरों के विद्यालय परिसर में प्रवेश करने की आशंका बनी रहती है। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि इस संबंध में कई बार लिखित शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अभी तक मरम्मत का काम नहीं हुआ। विद्यालय से जुड़े लोगों के मुताबिक स्वीकृत राशि एक लाख रुपये से अधिक होने के कारण काम संबंधित विभागीय स्तर से कराया जाना है। उनका दावा है कि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ।
शिक्षा का मंदिर या शराबियों की शरणगाह?
विद्यालय की स्थिति को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिस परिसर में बच्चों का भविष्य तैयार होना चाहिए, वहां अगर शराब की बोतलें और टूटे कांच मिलें तो जिम्मेदारी किसकी है?
विद्यालय प्रबंधन, विद्यार्थी और ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि स्कूल परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, शराब की दुकान को लेकर शिकायत की जांच हो, असामाजिक तत्वों की आवाजाही रोकी जाए और लंबे समय से लंबित मरम्मत कार्य तत्काल शुरू कराया जाए। अब देखना होगा कि शिकायतों और आरोपों के बाद प्रशासन इस विद्यालय की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर क्या कदम उठाता है।
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