बतंगड़ स्पेशल
ग्रामीणों के विरोध के बावजूद हिंदुस्तान जिंक का निर्माण कार्य जारी, प्रदूषण और अतिक्रमण के आरोपों से बढ़ा विवाद
चित्तौड़गढ़। जिले के बिलिया गांव में हिंदुस्तान जिंक के प्रस्तावित रासायनिक (खाद) प्लांट को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार विरोध, शिकायतों और जनसुनवाई के बावजूद कंपनी निर्माण कार्य तेज़ी से जारी रखे हुए है। किसानों का कहना है कि प्लांट से निकलने वाले धुएं, गैस, रासायनिक प्रदूषण और अपशिष्ट जल के कारण खेती चौपट हो चुकी है, कई परिवार पलायन करने को मजबूर हैं और प्रशासन उनकी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा।
ग्रामीणों के अनुसार 10 मार्च 2026 को प्रस्तावित प्लांट को लेकर जनसुनवाई आयोजित की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराए थे। उनका आरोप है कि जनसुनवाई के बाद भी निर्माण कार्य नहीं रुका और प्लांट का कार्य लगातार जारी है।
सरकारी सड़क पर अतिक्रमण का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्लांट परिसर के विस्तार के लिए सरकारी सड़क पर अतिक्रमण किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस संबंध में एसडीएम, तहसीलदार, पुलिस प्रशासन और अन्य अधिकारियों को कई बार शिकायतें दी गईं। अधिकारियों की मौजूदगी में कार्रवाई का आश्वासन भी मिला, लेकिन अब तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया। ग्रामीणों का दावा है कि सड़क पर निर्माण कार्य लगातार जारी है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।
प्रदूषण से खेती बर्बाद होने का दावा
स्थानीय किसानों का कहना है कि प्लांट से निकलने वाले धुएं, गैस और रासायनिक पदार्थों ने आसपास की कृषि भूमि को प्रभावित किया है। उनका आरोप है कि खेतों की उर्वरता समाप्त हो गई है, फसल उत्पादन लगभग बंद हो चुका है और कई किसानों को गांव छोड़कर अन्य शहरों में रोजगार तलाशने जाना पड़ा।
बिलिया निवासी किसान प्रमोद शिमली ने बताया कि उनकी लगभग साढ़े तीन बीघा कृषि भूमि वर्षों से प्रभावित है। उनके अनुसार खेत में अब फसल नहीं होती और आर्थिक संकट के कारण उन्हें करीब 10–12 वर्ष पहले गांव छोड़कर उदयपुर जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि जमीन बेचना भी संभव नहीं हो पा रहा है क्योंकि प्रदूषण के कारण कोई खरीदार तैयार नहीं है। उन्होंने मांग की कि या तो कंपनी उनकी जमीन खरीदे या प्रभावित परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
नाले में अपशिष्ट जल छोड़ने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट परिसर की दीवार के पास बने एक हिस्से से रासायनिक अपशिष्ट और गंदा पानी समीप स्थित नाले में छोड़ा जाता है, जिससे जल स्रोत और आसपास के खेत प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।
पुलिस कार्रवाई और दबाव के आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि जब भी वे निर्माण कार्य रुकवाने का प्रयास करते हैं, पुलिस मौके पर पहुंच जाती है और विरोध करने वालों को वहां से हटाया जाता है। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों को भी विरोध के दौरान पुलिस कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
जनप्रतिनिधियों से भी नहीं मिली राहत
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सांसद, विधायक, जिला प्रशासन और अन्य अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनका आरोप है कि सभी स्तरों पर उन्हें केवल आश्वासन मिला, जबकि निर्माण कार्य लगातार जारी है।
अधिकारियों का पक्ष
स्थानीय प्रशासन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि 10 मार्च की जनसुनवाई में प्राप्त आपत्तियों और सुझावों का प्रतिवेदन तैयार कर संबंधित विभागों तथा वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्लांट से संबंधित विभिन्न अनुमतियों का विषय उच्च स्तर पर विचाराधीन है तथा प्राप्त शिकायतों की रिपोर्ट भी सक्षम अधिकारियों को भेजी गई है। आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।
पेयजल संकट भी बना बड़ी समस्या
बिलिया गांव में वर्षों पहले बनी पानी की टंकी आज तक शुरू नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र का भूजल प्रदूषित होने के कारण पीने योग्य नहीं रहा। ऐसे में गांव में टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पेयजल के लिए उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है, जबकि स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- प्रस्तावित प्लांट के निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- प्रदूषण की वैज्ञानिक जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- सरकारी सड़क से अतिक्रमण हटाया जाए।
- प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा एवं रोजगार दिया जाए।
- गांव में सुरक्षित पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे आंदोलन जारी रखेंगे।

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