Connect with us

देश

इंजीनियरिंग से डिजिटल राजनीति तक, कैसे एक यूट्यूबर बना देश की बहस का चर्चित चेहरा

Published

on

cropped C6 2

कभी इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाला एक युवा आज भारतीय डिजिटल राजनीति की सबसे चर्चित आवाजों में गिना जाता है। यह कहानी है ध्रुव राठी की एक ऐसे डिजिटल क्रिएटर की, जिसने पारंपरिक पत्रकारिता का हिस्सा बने बिना राजनीति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक मुद्दों पर लाखों लोगों तक अपनी बात पहुंचाई।

राठी की कहानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल एक व्यक्ति के यूट्यूब पर सफल होने की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी भी है, जिसमें सोशल मीडिया ने राजनीतिक जानकारी और बहस के पारंपरिक रास्तों को चुनौती दी है।

हरियाणा से जर्मनी तक

ध्रुव राठी का शुरुआती जीवन हरियाणा में बीता। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए जर्मनी गए। उन्होंने कार्लज़ूहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और आगे रिन्यूएबल एनर्जी इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर राठी बताते हैं कि उनकी रुचि अर्थशास्त्र और राजनीतिक विज्ञान में भी रही और उन्होंने इन विषयों का अध्ययन किया। यानी उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि सीधे राजनीति या पत्रकारिता की नहीं थी। यही अंतर आगे उनके कंटेंट की शैली में भी दिखाई दिया वे राजनीतिक विषयों को अक्सर आंकड़ों, दस्तावेजों, ग्राफिक्स और सरल व्याख्या के जरिए समझाने की कोशिश करते हैं।

नौकरी से ज्यादा आकर्षित किया यूट्यूब

जर्मनी में पढ़ाई और इंटर्नशिप के दौरान राठी को महसूस हुआ कि पारंपरिक 9 से 5 नौकरी उनका अंतिम लक्ष्य नहीं है। 2014 के आसपास उन्होंने यूट्यूब पर वीडियो बनाना शुरू किया। शुरुआत यात्रा और फोटोग्राफी से जुड़े वीडियो से हुई थी। बाद में उनका ध्यान भारत के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों की ओर गया। 2014 में राजनीतिक विषय पर बनाए गए उनके एक वीडियो के बाद उनके चैनल को पहचान मिलने लगी। हालांकि यह सफलता अचानक स्थायी नहीं हुई। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, शुरुआती दौर में उन्हें अपने पहले यूट्यूब भुगतान तक पहुंचने में लगभग एक साल लगा और चैनल को बड़े स्तर पर बढ़ने में कई वर्ष लगे।

यहीं से राठी की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शुरू होता है, उन्होंने यूट्यूब को सिर्फ वीडियो साझा करने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने लिए एक स्वतंत्र मीडिया प्लेटफॉर्म बना लिया।

राजनीति बनी पहचान

समय के साथ ध्रुव राठी ने सरकार की नीतियों, चुनाव, अर्थव्यवस्था, लोकतंत्र, मीडिया और सामाजिक मुद्दों पर वीडियो बनाना शुरू किया। उनका कंटेंट मुख्यतः व्याख्यात्मक शैली का रहा, जिसमें वे किसी मुद्दे को सरल भाषा में समझाने और अपने निष्कर्ष तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। राठी खुद अपने काम को लोकतंत्र, स्वतंत्रता, तार्किक सोच और सत्ता से सवाल पूछने जैसे मूल्यों से जोड़ते हैं। लेकिन यहीं से उनके करियर का दूसरा पहलू भी सामने आता है। उनके समर्थक उन्हें जटिल मुद्दों को सरल बनाने वाला डिजिटल शिक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उनके राजनीतिक विश्लेषण को एकतरफा बताते हैं। इसलिए उनके प्रभाव का आकलन केवल उनके समर्थकों या आलोचकों के नजरिए से करना उचित नहीं होगा।

2024 में बढ़ा राजनीतिक प्रभाव

Dhruv Rathee

लोकसभा चुनाव 2024 ने ध्रुव राठी को राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया। चुनाव से पहले उनके सरकार की आलोचना करने वाले कई वीडियो तेजी से वायरल हुए। इकोनॉमिक टाइम्स ने मई 2024 में रिपोर्ट किया कि अप्रैल 2024 में राठी के यूट्यूब चैनल ने करीब 25 लाख नए सब्सक्राइबर्स जोड़े थे। उसी दौर में उनका एक राजनीतिक वीडियो करोड़ों बार देखा गया। यह बदलाव सिर्फ राठी की व्यक्तिगत लोकप्रियता नहीं था। 2024 के चुनाव में यूट्यूब और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म राजनीतिक संचार के महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरे। राजनीतिक दलों और पारंपरिक मीडिया के साथ-साथ स्वतंत्र डिजिटल क्रिएटर्स भी मतदाताओं तक पहुंच बनाने लगे। यहीं ध्रुव राठी की कहानी एक व्यक्तिगत सफलता से आगे बढ़कर डिजिटल लोकतंत्र की कहानी बन जाती है।

क्या ध्रुव राठी किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हैं?

यह सवाल अक्सर उनकी राजनीतिक टिप्पणियों के कारण पूछा जाता है। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार उन्हें किसी भारतीय राजनीतिक दल का आधिकारिक सदस्य या पदाधिकारी नहीं बताया गया है। इकोनॉमिक्स टाइम्स ने भी 2024 में उन्हें किसी राजनीतिक पार्टी से आधिकारिक रूप से जुड़ा हुआ नहीं बताया था। हालांकि राजनीतिक दल से औपचारिक संबंध न होना और राजनीतिक रूप से निष्पक्ष होना एक ही बात नहीं है। किसी भी टिप्पणीकार के विचारों का मूल्यांकन उसके तर्क, इस्तेमाल किए गए स्रोत और प्रस्तुत किए गए तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। यही किसी भी डिजिटल राजनीतिक कंटेंट को देखने का तार्किक तरीका है।

विवाद भी बने पहचान का हिस्सा

जितनी तेजी से राठी की लोकप्रियता बढ़ी, उतनी ही तेजी से वे विवादों में भी आए। उनके वीडियो की तथ्यात्मकता, निष्पक्षता और राजनीतिक दृष्टिकोण पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। 2024 में एक मानहानि मामले में दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा राठी के वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। केजरीवाल ने अदालत में उस पोस्ट को साझा करने के लिए माफी मांगी थी। यह मामला राठी के कंटेंट की राजनीतिक पहुंच और उससे जुड़े कानूनी विवादों की एक मिसाल बना। इससे एक बड़ा सवाल भी सामने आता है, क्या लाखों लोगों तक पहुंच रखने वाले डिजिटल क्रिएटर को पत्रकार की तरह देखा जाए या एक स्वतंत्र टिप्पणीकार की तरह? इसका सरल उत्तर है: दोनों को एक नहीं माना जाना चाहिए। डिजिटल क्रिएटर का प्रभाव बड़ा हो सकता है, लेकिन पत्रकारिता के पेशेवर मानक और व्यक्तिगत राजनीतिक टिप्पणी अलग-अलग चीजें हैं।

निजी जीवन

ध्रुव राठी ने जूली एल्ब्र के साथ लंबे समय तक संबंध के बाद 2021 में वियना के बेलेवेडेरे पैलेस में शादी की। दोनों की मुलाकात जर्मनी में हुई थी। 2024 में दंपति ने अपने पहले बच्चे के जन्म की जानकारी सार्वजनिक की। हालांकि राठी की सार्वजनिक पहचान मुख्यतः उनके डिजिटल काम से बनी है और वे अपने निजी जीवन की तुलना में अपने कंटेंट को ज्यादा महत्व देते हैं।

यूट्यूब से आगे बढ़ता कारोबार

राठी का काम अब केवल एक यूट्यूब चैनल तक सीमित नहीं है। वे व्लॉग और शॉर्ट्स चैनल के अलावा अपनी ध्रुव राठी एकेडमी भी चलाते हैं, जहां कंटेंट क्रिएशन और दूसरी प्रैक्टिकल स्किल्स से जुड़े कोर्सेज उपलब्ध हैं। इससे स्पष्ट है कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत पहचान को एक व्यापक डिजिटल मीडिया ब्रांड में बदल दिया है।

ध्रुव राठी की सफलता का असली कारण क्या है?

ध्रुव राठी की सफलता को केवल उनकी राजनीतिक विचारधारा से समझना अधूरा होगा। उनकी लोकप्रियता के पीछे कम-से-कम तीन महत्वपूर्ण कारण दिखाई देते हैं।

पहला—जटिल विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना।

दूसरा—यूट्यूब के एल्गोरिथम और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की समझ।

तीसरा—ऐसे समय में राजनीतिक विषयों पर लगातार कंटेंट बनाना, जब युवा वर्ग पारंपरिक समाचार माध्यमों के साथ-साथ सोशल मीडिया से भी जानकारी हासिल कर रहा है।

2024 के चुनाव के दौरान युवाओं के बीच यूट्यूबर्स से राजनीतिक जानकारी लेने का चलन भी सामने आया। इकोनॉमिक्स टाइम्स ने ऐसे युवा मतदाताओं का उल्लेख किया जो राजनीतिक जानकारी के लिए यूट्यूबर्स पर निर्भर थे।

व्यक्ति से बड़ा है बदलाव

ध्रुव राठी की कहानी को सिर्फ एक यूट्यूबर की सफलता कह देना शायद उनके प्रभाव को छोटा करके देखना होगा। उनकी यात्रा उस दौर की कहानी है, जहां एक व्यक्ति बिना किसी बड़े मीडिया संस्थान के करोड़ों दर्शकों तक पहुंच सकता है और राष्ट्रीय बहस को प्रभावित कर सकता है। लेकिन उनकी कहानी का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। डिजिटल लोकप्रियता को पत्रकारिता की निष्पक्षता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। किसी भी राजनीतिक वीडियो को समझने के लिए दर्शक को दावे, स्रोत, आंकड़े और संदर्भ खुद जांचने चाहिए।

यही ध्रुव राठी की कहानी से निकलने वाला सबसे तर्कसंगत निष्कर्ष है आज की राजनीति में केवल राजनीतिक दल ही जनमत को प्रभावित नहीं करते; डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभाव रखने वाला एक व्यक्ति भी सार्वजनिक बहस की दिशा बदल सकता है। और शायद यही वजह है कि ध्रुव राठी आज सिर्फ एक यूट्यूबर नहीं, बल्कि भारत में बदलते डिजिटल राजनीतिक परिदृश्य के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखे जाते हैं।

Continue Reading
Click to comment

You must be logged in to post a comment Login

Leave a Reply

Advertisement

Trending

Copyright © 2025 Batangarh. Designed by ❤️ TrafficRaid.com