देश
सीएम मोहन यादव पर लगे आरोपों का भाजपा ने किया खंडन, कहा- तथ्यहीन दावों से छवि धूमिल करने की कोशिश
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़े भूमि मामलों को लेकर लगाए गए आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा प्रतिवाद किया है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार, तथ्यहीन और भ्रम फैलाने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री की छवि को धूमिल करने के लिए सुनियोजित तरीके से गलत तथ्यों को प्रस्तुत किया जा रहा है।
खंडेलवाल ने कहा कि वर्ष 2023 के चुनावी नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम 17.967 एकड़ भूमि दर्ज थी और जून 2026 तक इसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। इसी प्रकार उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम दर्ज लगभग 12.29 एकड़ भूमि में भी कोई नई खरीद या उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है। मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव यादव के नाम दर्ज 16.38 एकड़ भूमि भी मुख्यमंत्री बनने से पहले की है और वर्ष 2023 के बाद उसमें कोई बदलाव नहीं आया।
भूमि रिकॉर्ड और हलफनामे में नहीं दिखी बढ़ोतरी
भाजपा ने दावा किया कि उपलब्ध भूमि अभिलेख और चुनावी हलफनामे यह स्पष्ट करते हैं कि मुख्यमंत्री बनने के बाद डॉ. मोहन यादव, उनकी पत्नी सीमा यादव और पुत्र वैभव यादव के नाम दर्ज कृषि भूमि में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। पार्टी के अनुसार जिन जमीनों का उल्लेख किया जा रहा है, वे अधिकांशतः वर्षों पहले खरीदी गई थीं या पैतृक संपत्ति के रूप में प्राप्त हुई थीं।
सिद्धि विनायक कंपनी से भी नहीं जुड़ा मुख्यमंत्री का वर्तमान संबंध
भाजपा ने सिद्धि विनायक कंपनी को लेकर लगाए गए आरोपों को भी खारिज किया। पार्टी के अनुसार डॉ. मोहन यादव और उनकी पत्नी ने वर्ष 2017 में ही कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था। मार्च 2026 में उन्होंने अपने सभी शेयर भी छोड़ दिए। कंपनी के पास नवंबर 2023 में 68.43 एकड़ भूमि थी, जो जून 2026 तक घटकर 65.69 एकड़ रह गई। ऐसे में भूमि विस्तार का आरोप तथ्यों से मेल नहीं खाता।
बहू की खरीदी गई भूमि मास्टर प्लान क्षेत्र से बाहर
भाजपा के अनुसार मुख्यमंत्री की पुत्रवधू शालिनी यादव द्वारा खरीदी गई 10 एकड़ कृषि भूमि मास्टर प्लान क्षेत्र के बाहर स्थित है। पार्टी का कहना है कि इसे किसी विकसित या प्रस्तावित शहरी क्षेत्र की भूमि बताना भ्रामक है। यह खरीद वैधानिक प्रक्रिया के तहत कृषि भूमि के रूप में की गई थी।
रिश्तेदारों के स्वतंत्र व्यवसाय को मुख्यमंत्री से जोड़ना अनुचित
भाजपा ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के रिश्तेदार स्वतंत्र रूप से अपने व्यवसाय और संपत्ति संबंधी निर्णय लेते हैं। उनके द्वारा खरीदी या बेची गई जमीनों को मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जोड़ना उचित नहीं है। पार्टी का कहना है कि उज्जैन में वर्षों से निवासरत परिवारों और रिश्तेदारों के स्वतंत्र आर्थिक लेन-देन को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
मास्टर प्लान पहले से प्रभावी, नई सड़क योजनाओं का दावा गलत
भाजपा के अनुसार उज्जैन का मास्टर प्लान-2035 मई 2023 से प्रभावी है, जो डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले लागू हो चुका था। इसलिए यह कहना गलत है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद नई सड़कों या हाईवे की योजनाएं घोषित कर किसी विशेष क्षेत्र को लाभ पहुंचाया गया। सभी विकास कार्य पूर्व निर्धारित मास्टर प्लान के अनुसार किए जा रहे हैं।
विकास कार्यों से घबराई कांग्रेस: खंडेलवाल
प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में किसानों के कल्याण, औद्योगिक निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास को गति दे रहे हैं। कांग्रेस विकास के मुद्दों पर मुकाबला नहीं कर पा रही है, इसलिए इस प्रकार के आरोप लगाकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता सच्चाई को समझती है और राजनीतिक षड्यंत्रों को स्वीकार नहीं करेगी। भाजपा का दावा है कि उपलब्ध दस्तावेज, भूमि रिकॉर्ड और चुनावी हलफनामे मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर लगाए गए आरोपों का समर्थन नहीं करते, बल्कि यह साबित करते हैं कि उनके नाम दर्ज भूमि में मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई उल्लेखनीय परिवर्तन नहीं हुआ है।
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