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सुभाष नगर में बुलडोजर कार्रवाई के बाद भड़का लोगों का गुस्सा, मलबे और सुरक्षा को लेकर उठे सवाल

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नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली के सुभाष नगर स्थित पैसिफिक मॉल के पीछे की बस्ती में बुलडोजर कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि कार्रवाई के बाद कई स्थानों पर जर्जर स्लैब और दीवारों को अधूरी अवस्था में छोड़ दिया गया है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भवनों के निचले हिस्से को तोड़ दिया गया, जबकि ऊपर का हिस्सा जस का तस छोड़ दिया गया। उनका कहना है कि यदि यह ढांचा गिरता है तो राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

पर्याप्त समय नहीं मिला

प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें मकान खाली करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि बुलडोजर कार्रवाई शुरू होने से पहले न तो सामान निकालने का पर्याप्त अवसर मिला और न ही किसी वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी दी गई। कई परिवारों का कहना है कि उनका घरेलू सामान मलबे में दब गया और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

पुनर्वास को लेकर उठे सवाल

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई से पहले पुनर्वास की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि अतिक्रमण हटाना आवश्यक था तो पहले प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। लोगों ने यह भी दावा किया कि अन्य स्थानों पर विस्थापित परिवारों को पुनर्वास मिला है, जबकि यहां ऐसा नहीं हुआ।

दो फीट की जगह ज्यादा हिस्सा तोड़ा

कुछ प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें केवल सीमित हिस्से को हटाने की जानकारी दी गई थी, लेकिन कार्रवाई के दौरान अपेक्षा से अधिक हिस्सा तोड़ दिया गया। उनका कहना है कि इससे कई परिवार पूरी तरह बेघर हो गए और उनकी वर्षों की जमा पूंजी एक ही दिन में मलबे में बदल गई।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर नाराजगी

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि क्षेत्र में आते हैं, लेकिन कार्रवाई के बाद उनकी समस्याएं सुनने कोई नहीं पहुंचा। लोगों ने कहा कि कार्रवाई के बाद उनकी स्थिति जानने या राहत उपलब्ध कराने के लिए कोई जनप्रतिनिधि मौके पर नहीं आया। स्थानीय नागरिकों ने मलबे के बीच छोड़े गए असुरक्षित ढांचों को तत्काल हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में बच्चे और बुजुर्ग लगातार आवाजाही करते हैं तथा किसी भी समय जर्जर स्लैब गिरने से गंभीर दुर्घटना हो सकती है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मलबा हटाने के साथ-साथ क्षेत्र को सुरक्षित बनाया जाए।

प्रशासन से मांग

प्रभावित परिवारों ने मांग की है कि बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित लोगों को राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए, क्षतिग्रस्त व असुरक्षित ढांचों को तत्काल हटाया जाए तथा भविष्य में ऐसी कार्रवाई से पहले पर्याप्त नोटिस और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।

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