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बुलडोजर के नीचे बिखरी मूर्तियां, उजड़ गई कारीगरों की रोजी-रोटी
नई दिल्ली। रानी गार्डन में डीडीए की जमीन पर हुई कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में देवी-देवताओं की मूर्तियां टूटकर मलबे में तब्दील हो गईं। यहां कई वर्षों से मूर्ति निर्माण का काम कर रहे कारीगरों का आरोप है कि उन्हें सामान और तैयार मूर्तियां हटाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और अचानक बुलडोजर चला दिया गया।
कारीगरों के मुताबिक, यहां गणेश, विश्वकर्मा और दुर्गा समेत करीब 300 से अधिक मूर्तियां तैयार की जा रही थीं। कई मूर्तियां लगभग पूरी हो चुकी थीं और सिर्फ रंग-रोगन बाकी था। कार्रवाई में उनका करीब 12 से 15 लाख रुपये का नुकसान होने का दावा किया गया है।
कर्ज लेकर बनाया था सामान
कारीगरों का कहना है कि मूर्ति निर्माण का काम सालभर नहीं चलता। वे कुछ महीनों के सीजन में काम करके अपने परिवार का खर्च चलाते हैं। इस बार दिल्ली, फरीदाबाद, पानीपत और अन्य जगहों से ऑर्डर मिले थे। कार्रवाई के बाद तैयार मूर्तियां टूटने से अब ऑर्डर पूरे करना भी मुश्किल हो गया है।
एक कारीगर ने बताया कि उन्होंने जमीन के लिए करीब 10 हजार रुपये किराया दिया था। उनका आरोप है कि कार्रवाई से पहले पर्याप्त समय नहीं मिला। उनका कहना है कि अगर पहले सूचना दी जाती तो वे मूर्तियों और सामान को सुरक्षित निकाल लेते।
मजदूरों के सामने भी संकट
मूर्ति निर्माण से जुड़े करीब 8-10 मजदूरों के सामने भी अब रोजगार और भुगतान का संकट खड़ा हो गया है। कारीगरों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर काम में पैसा लगाया था और अब नुकसान की भरपाई कौन करेगा, यह बड़ा सवाल है। कारीगरों ने सरकार से नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है। इस कार्रवाई ने सरकारी जमीन, अवैध कब्जे और बुलडोजर कार्रवाई के तरीके को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
जमीन खाली कराना प्रशासनिक अधिकार का विषय हो सकता है, लेकिन प्रभावित लोगों का सवाल है कि क्या कार्रवाई से पहले उन्हें पर्याप्त समय देकर उनकी मेहनत और तैयार सामान को बचाने का मौका नहीं दिया जा सकता था?
इस मामले में डीडीए और संबंधित प्रशासन का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

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