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बिहार में परीक्षा व्यवस्था पर सवाल: छात्रों का आरोप पेपर लीक सुनियोजित, लाइट कटने के बीच होती है धांधली
पटना। बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों ने एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पटना में दरोगा भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र की तस्वीरें बाहर पहुंचीं और सोशल मीडिया पर उनके उत्तर वायरल किए गए। छात्रों का कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि पूरी तरह सुनियोजित प्रक्रिया हो सकती है।
लाइट कटने को लेकर गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारी छात्रों के मुताबिक, परीक्षा शुरू होने के कुछ समय बाद और परीक्षा समाप्त होने से पहले कई केंद्रों पर बिजली कटने की स्थिति बनी। छात्रों का आरोप है कि इसी दौरान प्रश्नपत्र की तस्वीरें बाहर भेजी गईं और उन्हें हल करके वापस अभ्यर्थियों तक पहुंचाने की कोशिश हुई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
न प्रश्नपत्र मिला, न ओएमआर की कॉपी
एक अभ्यर्थी ने बताया कि परीक्षा के बाद उन्हें प्रश्नपत्र, कार्बन कॉपी या तत्काल उत्तर कुंजी नहीं दी गई। परीक्षा केंद्र से बाहर निकलने के बाद सोशल मीडिया और टेलीग्राम पर परीक्षा में पूछे गए प्रश्न वायरल दिखाई दिए। छात्रों का कहना है कि पारदर्शिता के लिए प्रश्नपत्र, ओएमआर और उत्तर कुंजी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
आयोग से शिकायत के बाद हाईकोर्ट पहुंचे छात्र
छात्रों के अनुसार, उन्होंने कथित पेपर लीक से जुड़े साक्ष्य आयोग के सामने रखे थे और जांच का भरोसा मिला था। लेकिन छात्रों का आरोप है कि जांच पूरी होने से पहले ही परिणाम जारी कर दिया गया। इसके बाद एक अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट का रुख किया।
3 अगस्त को मामले की पहली सुनवाई हुई। छात्रों के मुताबिक, आयोग की ओर से पेश वकील ने जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा है। अब 24 अगस्त को मामले की अगली सुनवाई होनी है।
बायोमेट्रिक कंपनी पर भी सवाल
प्रदर्शनकारी छात्रों ने परीक्षा में बायोमेट्रिक व्यवस्था संभालने वाली कंपनी को लेकर भी जांच की मांग की है। छात्रों का दावा है कि कंपनी के पुराने रिकॉर्ड और कथित ब्लैकलिस्टिंग की जानकारी की जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में किसी कंपनी को जिम्मेदारी देने से पहले उसकी पूरी पृष्ठभूमि की जांच जरूरी है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
पांच साल की मेहनत पर पानी फिर जाता
कई छात्रों ने बताया कि वे चार-पांच साल से पटना में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। परिवार से पैसे लेकर पढ़ाई करने वाले इन युवाओं का कहना है कि बार-बार परीक्षा में अनियमितता की शिकायतें सामने आने से उनका भविष्य और मानसिक दबाव दोनों बढ़ रहे हैं। एक छात्र ने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में ही भ्रष्टाचार होगा तो आगे व्यवस्था में ईमानदारी कैसे आएगी। छात्रों की मांग है कि कथित पेपर लीक की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि जांच में पेपर लीक या बड़े स्तर पर अनियमितता की पुष्टि होती है तो परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की जाए। छात्रों का आरोप है कि बार-बार पेपर लीक की शिकायतों से युवाओं का परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हो रहा है।
अब सभी की नजर 24 अगस्त की हाईकोर्ट सुनवाई पर है, जहां आयोग का पक्ष सामने आने के बाद मामले की अगली दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।अगर इसे और ज्यादा दमदार फ्रंट-पेज स्टोरी की तरह बनाना हो तो हेडिंग को और तीखा किया जा सकता है।

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