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18 साल से लाइब्रेरियन भर्ती का इंतजार, अब भूख हड़ताल पर अभ्यर्थी
पटना। बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का इंतजार अब आंदोलन में बदलता जा रहा है। पटना के गर्दनीबाग में एक तरफ लाइब्रेरियन भर्ती की मांग को लेकर अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठ गए हैं, तो दूसरी तरफ BPSC TRE-4 के अभ्यर्थी भी भर्ती का विज्ञापन जारी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। लाइब्रेरियन अभ्यर्थियों का दावा है कि वे करीब 18 वर्षों से भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार प्रदर्शन और अधिकारियों से मुलाकात के बावजूद अब तक ठोस फैसला नहीं हुआ है।
18 साल का इंतजार, 25 से ज्यादा प्रदर्शन का दावा
लाइब्रेरियन अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती के इंतजार में उनकी उम्र और तैयारी के साल दोनों बढ़ते चले गए, लेकिन नौकरी का रास्ता नहीं खुला। प्रदर्शन में शामिल एक अभ्यर्थी ने कहा कि वे अब तक करीब 25 बार आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन हर बार आश्वासन के बाद मामला आगे नहीं बढ़ पाया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि जब वे शिक्षा विभाग के अधिकारियों और मंत्री से अपनी मांग रखने जाते हैं तो उन्हें तैयारी जारी रखने की सलाह दी जाती है। उनका सवाल है कि जब भर्ती ही वर्षों से नहीं निकली तो वे आखिर कितने साल तक तैयारी करते रहें। एक अभ्यर्थी ने अपने संघर्ष की तुलना राम के वनवास से करते हुए कहा कि 14 साल का वनवास भी खत्म हो गया, लेकिन उनका ‘वनवास’ 18 साल बाद भी जारी है।
‘बीएड के लिए जमीन बेच दी, अब नौकरी का इंतजार’

आंदोलन में शामिल कुछ अभ्यर्थियों ने अपनी आर्थिक परेशानियां भी सामने रखीं। एक अभ्यर्थी ने बताया कि बिहार में बीएड की पढ़ाई पर काफी खर्च आता है। नौकरी की उम्मीद में उन्होंने अपनी जमीन तक बेचकर पढ़ाई पूरी की, लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद भी ढाई साल से भर्ती के नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार की ओर से बार-बार आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन उन्हें अब आश्वासन नहीं बल्कि आधिकारिक विज्ञापन चाहिए।
‘बिना लाइब्रेरियन के शिक्षा व्यवस्था अधूरी’
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्कूल और कॉलेजों में लाइब्रेरियन की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनका आरोप है कि कई संस्थानों में लाइब्रेरियन का काम दूसरे शिक्षकों और कर्मचारियों से कराया जा रहा है। अभ्यर्थियों की मांग है कि बिहार में लाइब्रेरियन पात्रता परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया का आधिकारिक नोटिफिकेशन जल्द जारी किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
TRE-4 अभ्यर्थियों का भी प्रदर्शन

गर्दनीबाग में लाइब्रेरियन अभ्यर्थियों के साथ BPSC TRE-4 की भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थी भी प्रदर्शन करते नजर आए। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि वे करीब ढाई साल से भर्ती के विज्ञापन का इंतजार कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पहले भी भर्ती को लेकर कई बार समयसीमा और आश्वासन दिए गए, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। अभ्यर्थी TRE-4 के लिए स्पष्ट विज्ञापन, परीक्षा प्रक्रिया और रिक्त पदों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।
‘जुलाई में विज्ञापन नहीं तो इस्तीफा’ वाले बयान का मुद्दा
TRE-4 अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री के पहले दिए गए समयसीमा संबंधी बयान को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जुलाई में विज्ञापन जारी करने की बात कही गई थी और समय पर विज्ञापन नहीं आने की स्थिति में इस्तीफे की बात भी कही गई थी। अब जुलाई बीतकर अगस्त आ चुका है, लेकिन अभ्यर्थियों के मुताबिक उनकी मांग अभी पूरी नहीं हुई है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से सवाल किया कि अगर तय समयसीमा में भर्ती का विज्ञापन नहीं आया तो जवाबदेही किसकी होगी।
पांच दिन की भूख हड़ताल, आगे घेराव की चेतावनी
लाइब्रेरियन अभ्यर्थियों ने बताया कि आमरण अनशन की शुरुआत हो चुकी है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक शुरुआती तौर पर पांच दिन तक भूख हड़ताल जारी रखने की रणनीति है। इसके बाद भी मांग पूरी नहीं हुई तो शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री के आवास के घेराव जैसे कदम उठाने की चेतावनी दी गई है। अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि लाइब्रेरियन पात्रता परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को जल्द शुरू किया जाए। उनका कहना है कि वर्षों से चल रहे आंदोलन का अब कोई और विकल्प नहीं बचा है।
भाषण नहीं, रोजगार चाहिए
गर्दनीबाग की तस्वीरें बिहार की भर्ती व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों को सामने ला रही हैं। एक ओर 18 साल से भर्ती का इंतजार कर रहे लाइब्रेरियन अभ्यर्थी हैं, तो दूसरी ओर TRE-4 के अभ्यर्थी ढाई साल से विज्ञापन का इंतजार कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकारें बदलती रहीं, मंत्री बदलते रहे, लेकिन उनकी स्थिति नहीं बदली। अब उनकी मांग साफ है, झूठे बहाने नहीं, रोजगार चाहिए, भाषण नहीं, नोटिफिकेशन चाहिए।
अब देखना होगा कि गर्दनीबाग से उठी यह आंदोलन की आवाज सरकार तक पहुंचती है या फिर अभ्यर्थियों को अपने हक के लिए एक और लंबे संघर्ष का इंतजार करना पड़ेगा।

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