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60 घंटे बाद भी इंसाफ का इंतजार, 27 वर्षीय युवक की हत्या
दिल्ली। 27 वर्षीय सफाईकर्मी अनिल कुमार की हत्या के करीब 60 घंटे बाद भी परिवार इंसाफ का इंतजार कर रहा है। अनिल का शव लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल की मोर्चरी में रखा है, जबकि परिजन और साथी सफाईकर्मी अस्पताल के बाहर न्याय की मांग को लेकर डटे हैं। परिवार की तीन प्रमुख मांगें हैं—आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी, ₹1 करोड़ का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी।
परिजनों के मुताबिक, अनिल रविवार सुबह करीब 5 बजे काम के लिए घर से निकले थे। कल्याणपुरी इलाके में कूड़ा उठाने के दौरान कथित तौर पर एक व्यक्ति ने उन पर चाकू से हमला कर दिया। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल लाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
बेटे का चेहरा देखने के लिए भी करना पड़ा विवाद
अनिल के पिता का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें बेटे का चेहरा देखने के लिए भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि शुरुआत में पुलिसकर्मियों ने शव दिखाने से इनकार किया और विवाद के बाद उन्हें बेटे का चेहरा देखने दिया गया।
परिवार के मुताबिक, अनिल की मां पहले से अस्वस्थ हैं और उन्हें अभी तक बेटे की मौत की पूरी जानकारी नहीं दी गई है। परिवार उन्हें यही बता रहा है कि अनिल अस्पताल में है और जल्द ठीक हो जाएगा।

सफाईकर्मियों में भी आक्रोश
अनिल की हत्या के बाद बड़ी संख्या में सफाईकर्मी और उनके समर्थक अस्पताल के बाहर जुटे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जो कर्मचारी रोज शहर को साफ रखने का काम करते हैं, उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार और प्रशासन की है।
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि अगर सीसीटीवी और पुलिस व्यवस्था के बावजूद आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं हुआ, तो आम नागरिक अपनी सुरक्षा को लेकर किस पर भरोसा करे?
सरकार से जवाब का इंतजार
परिवार और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लंबे समय से प्रदर्शन के बावजूद सरकार या प्रशासन का कोई वरिष्ठ प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं पहुंचा। उनका कहना है कि उन्हें कम से कम आरोपी की जल्द गिरफ्तारी और परिवार को आर्थिक सहायता का ठोस आश्वासन मिलना चाहिए।
अनिल की हत्या ने सिर्फ एक परिवार को नहीं तोड़ा, बल्कि सफाईकर्मियों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा किया है।
एक तरफ 27 साल का बेटा खो चुका परिवार है, दूसरी तरफ आरोपी की गिरफ्तारी का इंतजार। अब सवाल प्रशासन से है, अनिल के परिवार को इंसाफ कब मिलेगा और सफाईकर्मियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन उठाएगा?

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