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ट्रॉमा सेंटर के पीछे मेडिकल वेस्ट का अंबार, वैक्सीन स्टोर के बाहर तीन साल से जलभराव
मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर स्थित जिला संयुक्त चिकित्सालय में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के पीछे बड़ी मात्रा में मेडिकल वेस्ट खुले में पड़ा मिला, जबकि उसी परिसर में स्थित वैक्सीन स्टोर के बाहर पिछले तीन वर्षों से जलभराव की समस्या बनी हुई है। अस्पताल परिसर की यह बदहाल स्थिति न केवल संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ा रही है, बल्कि मरीजों और कर्मचारियों के लिए भी परेशानी का कारण बनी हुई है।
खुले में पड़ा मेडिकल वेस्ट, संक्रमण का खतरा
अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के पीछे इस्तेमाल किए गए कैनुला, मेडिकल प्लास्टिक, बोतलें और अन्य जैव-चिकित्सीय कचरा खुले में बिखरा मिला। कुछ मेडिकल वेस्ट ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर छोड़ दिया गया था, जबकि शेष कचरा जमीन पर फैला हुआ था। आसपास आवारा पशु और कुत्ते इस कचरे में भोजन तलाशते दिखाई दिए, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका और बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल वेस्ट का समय पर निस्तारण नहीं होने से दुर्गंध फैलती है और आसपास रहने वाले लोग स्वास्थ्य जोखिम का सामना कर रहे हैं।
वैक्सीन स्टोर के बाहर तीन साल से जलभराव
अस्पताल परिसर में स्थित वैक्सीन स्टोर, जहां से पूरे मिर्जापुर शहर के लिए बच्चों के टीकाकरण की वैक्सीन भेजी जाती है, उसके बाहर लगातार जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कर्मचारियों के अनुसार यह समस्या करीब तीन वर्षों से बनी हुई है और कई बार शिकायत करने के बावजूद समाधान नहीं किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि जलभराव के कारण कार्यालय तक पहुंचने में कठिनाई होती है। उनका मानना है कि यदि उचित नाली निर्माण कर जल निकासी की व्यवस्था कर दी जाए तो समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।
शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने कई बार अस्पताल प्रबंधन को समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि बरसात के दिनों में स्थिति और अधिक खराब हो जाती है तथा कार्यालयों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
बाहर से खरीदनी पड़ती हैं दवाएं
अस्पताल में इलाज कराने आए कई मरीजों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाएं अक्सर अस्पताल में उपलब्ध नहीं होतीं, जिसके कारण उन्हें बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है। कुछ मरीजों ने यह भी कहा कि उपचार में अनावश्यक देरी होती है और कई मामलों में बार-बार अनुरोध करने के बाद ही सुनवाई होती है।
हालांकि मरीजों ने यह भी स्वीकार किया कि डॉक्टर समय पर अस्पताल में उपलब्ध रहते हैं, लेकिन अस्पताल की कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं में गंभीर खामियां हैं।
जन औषधि केंद्र का पक्ष
अस्पताल परिसर में संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के कर्मचारियों ने बताया कि उनके यहां अधिकांश आवश्यक दवाएं उपलब्ध रहती हैं और मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। उनका कहना था कि डॉक्टर कौन-सी दवा लिखते हैं, यह अस्पताल का विषय है, जबकि जन औषधि केंद्र उपलब्ध दवाओं के अनुसार मरीजों को दवा उपलब्ध कराने का प्रयास करता है।
स्वास्थ्य सुरक्षा पर उठे सवाल
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अस्पताल परिसर में मेडिकल वेस्ट का खुले में पड़ा रहना जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन के मानकों के विपरीत है। इससे संक्रमण फैलने, आवारा पशुओं के संपर्क में आने तथा पर्यावरण प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। वहीं वैक्सीन स्टोर जैसे संवेदनशील परिसर के बाहर लंबे समय तक जलभराव बने रहना भी गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना जा सकता है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों, कर्मचारियों और मरीजों ने अस्पताल प्रशासन तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि मेडिकल वेस्ट का वैज्ञानिक तरीके से तत्काल निस्तारण कराया जाए, वैक्सीन स्टोर के बाहर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए तथा अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्था में मूलभूत व्यवस्थाओं की अनदेखी आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
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