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कोयला राजधानी का काला सच: खनन ने उजाड़े घर, मुआवजे और पुनर्वास का अब भी इंतजार
धनबाद। देश की कोल कैपिटल कहे जाने वाले धनबाद की चमक के पीछे एक ऐसी हकीकत छिपी है, जिसे देखकर विकास के दावों पर सवाल खड़े होते हैं। जिले के भौरा 12 नंबर क्षेत्र में कोयला खनन के कारण कई घर खंडहर बन चुके हैं। जमीन जगह-जगह धंस रही है, मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं और सैकड़ों परिवार भय के साए में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
ब्लास्टिंग से कांपते घर
स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनन के दौरान तय मानकों का पालन नहीं किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जहां सीमित गहराई तक ब्लास्टिंग की अनुमति थी, वहां कहीं अधिक गहराई तक विस्फोट किए गए। इसका असर पूरे इलाके पर पड़ा। कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए और जमीन धंसने लगी। लोगों का कहना है कि ब्लास्टिंग के समय घरों की दीवारें और खाट तक हिलने लगती हैं, जिससे परिवारों को बाहर निकलना पड़ता है।
चार साल बाद भी नहीं मिला मुआवजा
पीड़ित परिवारों का कहना है कि कई मकान तीन से चार वर्ष पहले क्षतिग्रस्त हुए, लेकिन आज तक न तो उचित मुआवजा मिला और न ही स्थायी पुनर्वास। कुछ परिवारों को अस्थायी क्वार्टर दिए गए, जबकि बड़ी संख्या में लोग किराए या रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों ने कई बार सर्वे किया, आवेदन लिए, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
खंडहरों के बीच अब भी रह रहे सैकड़ों लोग
रिपोर्टिंग के दौरान यह सामने आया कि जिन घरों को बाहर से देखकर वीरान समझा जा रहा था, उनके आसपास अब भी सैकड़ों लोग रह रहे हैं। लोगों का कहना है कि मजबूरी में वे उन्हीं जर्जर मकानों में रह रहे हैं क्योंकि उनके पास दूसरा कोई ठिकाना नहीं है।
अवैध खनन और लापरवाही बनी वजह
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि खदानों में वैज्ञानिक तरीके से बैकफिलिंग नहीं की गई, जिससे जमीन अंदर से खोखली होती चली गई। उनका दावा है कि लगातार खनन और ब्लास्टिंग के कारण इलाके में धंसान बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन स्थिति में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ।
बच्चों और महिलाओं में हर समय डर का माहौल
क्षेत्र के बच्चों ने बताया कि ब्लास्टिंग होने पर उन्हें डर लगता है और कई बार पत्थर व मिट्टी घरों तक आ जाती है। महिलाओं का कहना है कि हर दिन यह आशंका बनी रहती है कि पता नहीं कब कोई मकान गिर जाए। कई परिवारों ने बताया कि रात में भी डर के कारण ठीक से नींद नहीं आती।
पुनर्वास योजनाओं पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से पुनर्वास की योजनाओं की घोषणा तो होती रही, लेकिन अधिकांश प्रभावित परिवार अब भी इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, उन्हें भी समय पर राहत नहीं मिली।
बीसीसीएल और प्रशासन पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि खनन कार्य से जुड़े अधिकारियों और प्रशासन को बार-बार जानकारी देने के बावजूद समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उनका कहना है कि यदि समय पर कार्रवाई होती तो कई परिवारों को अपना घर छोड़ने की नौबत नहीं आती।
क्या विकास की कीमत लोगों की सुरक्षा है?
धनबाद देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाला महत्वपूर्ण खनन क्षेत्र है। लेकिन सवाल यह है कि क्या खनिज संपदा निकालने की कीमत स्थानीय लोगों की सुरक्षा, उनका घर और उनका भविष्य होना चाहिए? विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब प्रभावित परिवारों को सुरक्षित पुनर्वास, उचित मुआवजा और सम्मानजनक जीवन मिल सके।
- भौरा 12 नंबर क्षेत्र में कई मकान धंसान और दरारों से प्रभावित।
- ग्रामीणों का आरोप—लगातार ब्लास्टिंग से बढ़ी समस्या।
- कई परिवारों का दावा—3 से 4 साल बाद भी मुआवजा नहीं मिला।
- प्रभावित परिवारों ने स्थायी पुनर्वास और सुरक्षा की मांग उठाई।
- स्थानीय लोगों ने खनन कार्यों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

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