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NEET पेपर लीक पर छात्रों का फूटा गुस्सा, NTA और शिक्षा मंत्रालय पर उठे सवाल
नई दिल्ली | NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर छात्रों और युवाओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। देशभर में छात्र राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक ने लाखों युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। छात्रों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है।
री-एग्जाम से बढ़ी मानसिक और आर्थिक परेशानी
छात्रों का कहना है कि दोबारा परीक्षा कराने का फैसला उनके मानसिक दबाव को और बढ़ा रहा है। कई अभ्यर्थियों ने बताया कि महीनों की तैयारी के बाद परीक्षा देने के बाद वे मानसिक रूप से आराम की स्थिति में पहुंच चुके थे, लेकिन अचानक री-एग्जाम की घोषणा ने उन्हें दोबारा तनाव में डाल दिया। कोटा और अन्य शहरों में रहकर तैयारी कर रहे छात्रों ने यात्रा, किराया और दोबारा तैयारी के खर्च को लेकर भी चिंता जताई है।

‘22 लाख छात्र भुगत रहे हैं सिस्टम की गलती’
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि कुछ लोगों की कथित गलती की सजा लाखों छात्र भुगत रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि पेपर लीक केवल छोटे स्तर की घटना नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा है। कई छात्रों ने दावा किया कि वर्षों से लगातार हो रहे पेपर लीक यह संकेत देते हैं कि परीक्षा प्रणाली में गहरी खामियां मौजूद हैं।
NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि एजेंसी की स्थापना परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा कायम करने के लिए की गई थी, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने छात्रों का विश्वास कमजोर कर दिया है। कुछ छात्रों और संगठनों ने NTA को भंग कर नई व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई।
CBI जांच और गिरफ्तारियों पर भी संदेह
सरकार की ओर से मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपे जाने और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई है। हालांकि प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि हर बार कार्रवाई और सख्त सजा के दावे किए जाते हैं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस बदलाव दिखाई नहीं देता। छात्रों का आरोप है कि पेपर लीक जैसे मामलों में केवल छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई होती है, जबकि बड़े नेटवर्क तक जांच नहीं पहुंच पाती।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर
कई छात्रों ने कहा कि लगातार पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने जैसी घटनाएं युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही हैं। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं और ऐसे मामलों से निराशा व तनाव बढ़ता है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
छात्रों की प्रमुख मांगें
- पेपर लीक की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच
- दोषियों पर कड़ी कार्रवाई
- परीक्षा प्रणाली में सुधार
- छात्रों के मानसिक और आर्थिक नुकसान पर ध्यान
- NTA की कार्यप्रणाली की समीक्षा
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े इस विवाद ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर होने के बीच अब निगाहें सरकार और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इस बार वास्तव में व्यवस्था में बदलाव देखने को मिलेगा या फिर यह मुद्दा भी समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा।
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