बतंगड़ स्पेशल
G20 का ‘ग्लोबल’ मिशन, कानपुर में ‘लोकल’ कबाड़: ₹85 लाख की आधुनिक मशीन ₹1.25 लाख के पट्टे के लिए 6 महीने से ठप
कानपुर। बड़ी शुरुआत और बेहद शर्मनाक अंत। वैश्विक मंच पर भारत की साख बढ़ाने वाले दिल्ली के ऐतिहासिक G20 शिखर सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण और ‘प्लास्टिक मुक्त समुद्र’ का जो संकल्प लिया गया था, वह उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर के विजयनगर नाले में दम तोड़ता नजर आ रहा है।
जर्मनी की संस्था के सहयोग और नगर आयुक्त शिव शरण अप्पा के प्रयासों से कानपुर के विजयनगर नाले पर उत्तर प्रदेश की पहली अत्याधुनिक ‘ट्रैश बूम’ मशीन लगाई गई थी। मकसद था—नालों के जरिए मां गंगा और फिर समुद्र में जाने वाले प्लास्टिक व थर्माकोल कचरे को रोकना। लेकिन आज ₹85 लाख की यह हाईटेक मशीन महज सवा लाख रुपए की ‘बेल्ट’ टूटने के कारण पिछले छह महीनों से कबाड़ बनी खड़ी है। नगर निगम की घोर लापरवाही के चलते यह मशीन खुद कचरे और जंग के ढेर में तब्दील हो रही है।
G20 के ‘ग्लोबल’ वादों की खुली पोल
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में आयोजित G20 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में जो बाइडन, ऋषि सुनक और इमैनुएल मैक्रॉन जैसे दिग्गज वैश्विक नेताओं ने समुद्री जीवों को बचाने और नदियों को स्वच्छ रखने का खाका खींचा था। इसी वैश्विक मुहिम के तहत कानपुर में यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ था। योजना थी कि विजयनगर के बाद इसे सीसामऊ और किदवई नगर नाले में भी लगाया जाएगा।
परंतु, ज़मीनी हकीकत यह है कि आज इस नाले में चारों तरफ सिर्फ प्लास्टिक की बोतलें, थर्माकोल और गंदगी जमा है, जो सीधे पांडु नदी और फिर मां गंगा में मिल रही है। ग्राउंड जीरो पर खड़े होकर यह सवाल लाज़मी लगता है कि जब विदेशी सहयोग के इस बड़े प्रोजेक्ट का यह हाल है, तो दुनिया के सामने हमारे उत्तर प्रदेश और देश की क्या छवि बनेगी?

फोटो खिंचवाई और भूल गए, अफसरशाही का रवैया
स्थानीय निवासियों और रिपोर्ट के अनुसार, जब इस मशीन का उद्घाटन हुआ था, तब बड़े-बड़े राजनेताओं और नगर निगम के आला अधिकारियों ने यहां आकर जमकर फोटो खिंचवाई और नमामि गंगे व ‘ग्रीन प्लांट’ के कसीदे पढ़े। लेकिन जैसे ही मशीन का पट्टा टूटा, कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इसकी सुध लेने नहीं आया।
ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि नगर निगम पूरी तरह से सुस्त और करप्ट हो चुका है। ₹85 लाख की जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा फूंकने के बाद क्या नगर निगम के पास ₹1.25 लाख का बजट भी नहीं है कि इस मशीन को दोबारा चालू किया जा सके?

नगर निगम की पोल खोलती ‘ट्रैश बूम’
यह मशीन सिर्फ प्लास्टिक कचरे को ही नहीं रोक रही थी, बल्कि इसकी वर्तमान दुर्दशा नगर निगम के दावों की पोल भी खोल रही है। यदि सरकार के पास आगे चलकर गंगा नदी में ही बड़े फिल्टर लगाने की योजना थी, तो जनता के ₹85 लाख इस नाले में क्यों बर्बाद किए गए? और अगर यह मशीन जरूरी थी, तो इसे 6 महीने से बंद क्यों रखा गया है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जीरो टॉलरेंस और त्वरित विकास की बात करते हैं, लेकिन कानपुर नगर निगम के सुस्त और लापरवाह अधिकारी उनके दावों पर पानी फेर रहे हैं। महज सवा लाख रुपए की बेल्ट के लिए एक करोड़ के प्रोजेक्ट को कबाड़ बना देना प्रशासनिक दिवालियापन को दर्शाता है। अधिकारी वातानुकूलित कमरों में सो रहे हैं और G20 का ‘क्लीन गंगा’ मिशन धरातल पर दम तोड़ रहा है। यदि जल्द ही नगर निगम इस सुस्ती से नहीं जागा, तो यह विफलता कानपुर के माथे पर एक बड़ा कलंक साबित होगी।
-
देश1 year agoसत्ता, पैसा और अंधविश्वास – बाबा इंडस्ट्री की असली कहानी
-
देश1 year agoन्याय के लिए डंडा खाती मां! 🚨 ममता सरकार पर सवाल | Kolkata Case
-
Blog1 year agoBageshwar Baba Exposed? 😱 Miracle ✨ या Illusion 🎭
-
एजुकेशन1 year agoखमरिया गांव की शिक्षा पर संकट: ताले में बंद प्राथमिक शाला और मधुशाला बनी माध्यमिक शाला

You must be logged in to post a comment Login