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जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर बच्चे, सवालों पर भड़के अधिकारी: स्कूल में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों से बदसलूकी
कानपुर | सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर किए जा रहे दावों के बीच एक स्कूल से सामने आई तस्वीरों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर दिखाई दिए, जबकि कक्षाओं में न पर्याप्त बेंच थीं और न ही पंखों जैसी जरूरी सुविधाएं।
मामला उस समय और विवादित हो गया जब स्कूल परिसर में रिपोर्टिंग करने पहुंचे पत्रकारों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई। आरोप है कि स्कूल प्रशासन और कर्मचारियों ने पत्रकारों को रोकने की कोशिश की और यहां तक कि परिसर का गेट बंद कर दिया गया।

जमीन पर बैठकर पढ़ रहे बच्चे
स्कूल परिसर में मौजूद कक्षाओं की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। कई बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ते नजर आए। कक्षाओं में न तो पर्याप्त टेबल-बेंच उपलब्ध थीं और न ही गर्मी से राहत देने के लिए छत पर पंखे लगे थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा हर साल शिक्षा के लिए भारी बजट जारी किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर सुविधाओं की कमी बनी हुई है।

पत्रकारों से कथित बदसलूकी
रिपोर्टिंग कर रही महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि स्कूल स्टाफ ने उन्हें कवरेज करने से रोका और परिसर के भीतर गेट बंद कर दिया। वीडियो में पत्रकार और कर्मचारियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
पत्रकारों का आरोप है कि जब उन्होंने बच्चों की सुविधाओं और स्कूल की स्थिति को लेकर सवाल पूछे, तो प्रशासन जवाब देने के बजाय रिपोर्टिंग रोकने में जुट गया।
‘स्मार्ट क्लास’ के दावों पर सवाल
घटना के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार के दावों पर भी सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष और स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां एक ओर डिजिटल और स्मार्ट क्लासरूम की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर कई स्कूलों में बच्चों के पास बैठने तक की व्यवस्था नहीं है।
बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता
अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गरीब परिवारों के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि यदि बच्चों को बेहतर माहौल, बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षित कक्षाएं मिलें, तो उनकी शिक्षा और भविष्य दोनों बेहतर हो सकते हैं।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
मामले के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों से स्कूल की स्थिति सुधारने, बच्चों के लिए पर्याप्त बेंच और पंखों की व्यवस्था करने तथा पत्रकारों से कथित बदसलूकी की जांच की मांग की जा रही है।
यह घटना केवल एक स्कूल की बदहाल तस्वीर नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था के उन सवालों को सामने लाती है जो वर्षों से उठते रहे हैं। बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका असर सीधे देश के भविष्य पर पड़ सकता है।

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