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कानपुर देहात का सरकारी स्कूल बदहाली की मिसाल, 17 साल बाद भी बिजली नहीं, बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर
कानपुर। सरकार सरकारी विद्यालयों में मिशन कायाकल्प, डिजिटल इंडिया और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों के जरिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार का दावा करती है। लेकिन कानपुर देहात के मलिकपुर प्राथमिक विद्यालय की तस्वीरें इन दावों की हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
विद्यालय परिसर में आज तक बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। वर्ष 2009 में बने इस स्कूल में बच्चे आज भी जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बारिश के दिनों में पूरा परिसर जलमग्न हो जाता है, जिससे बच्चों और शिक्षकों को विद्यालय तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
बारिश में स्कूल बन जाता है तालाब
स्थानीय लोगों और विद्यालय प्रशासन के अनुसार, स्कूल के चारों ओर जलभराव की समस्या वर्षों से बनी हुई है। बारिश के दौरान पास के तालाब और सड़क का पानी विद्यालय परिसर में भर जाता है। छोटे बच्चों को कक्षाओं तक पहुंचाने के लिए शिक्षकों को कई बार अपने निजी वाहन का सहारा लेना पड़ता है।
विद्यालय के समीप से गुजर रही हाईटेंशन विद्युत लाइन भी बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है। पेड़ों की शाखाएं तारों के संपर्क में आने से करंट फैलने की आशंका बनी रहती है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
विद्यालय में न तो पर्याप्त बेंच-डेस्क हैं और न ही आधुनिक शिक्षण संसाधन। अधिकांश बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। मध्याह्न भोजन भी बच्चों को जमीन पर बैठकर करना पड़ता है। भवन के कई हिस्सों में प्लास्टर उखड़ चुका है, दीवारों में दरारें दिखाई देती हैं और कई स्थानों पर सरिया तक बाहर निकल आई है। आंगनबाड़ी भवन और दिव्यांग बच्चों के लिए बनाए गए रैंप की स्थिति भी खराब बताई गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसके कारण कुछ ही वर्षों में भवन जर्जर होने लगा।
प्रधानाध्यापक ने बताई परेशानी
विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापक अनीता कनौजिया ने बताया कि जलभराव, बिजली और हाईटेंशन लाइन जैसी समस्याओं को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बारिश के समय बच्चों को सुरक्षित विद्यालय तक लाने के लिए कई बार उन्हें अपनी गाड़ी का उपयोग करना पड़ता है। विद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित होती है, जबकि एक ही शिक्षक को प्रशासनिक और ऑनलाइन कार्यों का अतिरिक्त बोझ भी उठाना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में मरम्मत और विकास कार्यों पर खर्च तो दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात नहीं बदलते। उनका आरोप है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बेहद खराब रही है, जिसके कारण कुछ वर्षों में ही भवन टूटने लगा।
मुख्य समस्याएं
वर्ष 2009 से संचालित विद्यालय में आज तक बिजली नहीं।
बारिश में पूरा परिसर जलमग्न हो जाता है।
बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर।
जर्जर भवन, उखड़ता प्लास्टर और बाहर निकली सरिया।
हाईटेंशन लाइन से सुरक्षा का खतरा।
शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव।
शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं होने का आरोप।
प्रशासन से उम्मीद
विद्यालय प्रशासन और ग्रामीणों ने मांग की है कि विद्यालय में तत्काल बिजली की व्यवस्था, जलनिकासी, भवन की मरम्मत, पर्याप्त फर्नीचर, शिक्षकों की नियुक्ति और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
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