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राजस्थान के गांवों में गहराया जल संकट: टंकियां बनीं शोपीस, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग

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जोधपुर | बालोतरा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या कोई नई नहीं है, लेकिन इस बार हालात बेहद गंभीर नजर आ रहे हैं। कई गांवों में लोग पीने के पानी के लिए लंबी प्रतीक्षा करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 10-10 दिनों तक पानी नहीं पहुंचता और जब पानी आता भी है, तो उसकी मात्रा बेहद कम होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बनाई गई बड़ी-बड़ी पानी की टंकियां अब केवल ढांचा बनकर रह गई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टंकियों और जल योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को राहत नहीं मिल पा रही।

टंकियां बनीं प्रतीक, पानी नहीं पहुंच रहा गांवों तक
स्थानीय निवासियों के अनुसार, जलापूर्ति व्यवस्था की मशीनें लंबे समय से खराब पड़ी हैं, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं कराई जा रही। इसके कारण टंकियों तक पानी पहुंच ही नहीं पा रहा। गांवों में खड़े अधिकांश पानी के टैंकर खाली हैं और लोग घंटों नहीं, बल्कि कई-कई दिनों तक अपनी बारी का इंतजार करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि एक बड़े इलाके में केवल एक टैंकर पानी पहुंचता है, जबकि इस क्षेत्र के अंतर्गत करीब 20 गांव आते हैं।

खारा पानी पीने को मजबूर ग्रामीण
स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई लोग मजबूरी में ट्यूबवेल का खारा पानी पी रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पीने योग्य पानी की कमी के कारण स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं।

अवैध कनेक्शनों और मोटर पंपों पर आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई जगह अवैध मोटर पंप और कनेक्शन लगे हुए हैं, जिससे जो थोड़ा बहुत पानी आता भी है, वह कुछ घरों तक सीमित रह जाता है। इससे आम लोगों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता।

जल जीवन मिशन पर उठे सवाल
केंद्र सरकार की ‘हर घर जल’ और ‘जल जीवन मिशन’ जैसी योजनाओं को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी दिखाई दी। लोगों का कहना है कि योजनाओं की घोषणा तो हुई, लेकिन स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण उनका लाभ गांवों तक नहीं पहुंच पाया।

स्थानीय प्रशासन पर उपेक्षा के आरोप
ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि न तो प्रशासनिक अधिकारी गांवों का दौरा करते हैं और न ही समस्या का स्थायी समाधान निकालने की कोशिश हो रही है।

बढ़ती गर्मी के साथ बढ़ेंगी मुश्किलें
राजस्थान में तापमान लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में गर्मी 50 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में जल संकट और गंभीर हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें कई बार रात के समय दूर-दराज के इलाकों से पानी लाना पड़ता है। कुछ लोग ट्रैक्टर और टैंकर लेकर 100 किलोमीटर दूर तक पानी लेने जाते हैं।

जोजरी नदी पर भी चिंता
स्थानीय लोगों ने जोजरी नदी के प्रदूषण का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि नदी में प्रदूषण और रासायनिक कचरे के कारण उपलब्ध जलस्रोत भी उपयोग के लायक नहीं बचे हैं।

राजस्थान के कई गांवों में जल संकट अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। करोड़ों की योजनाओं और बड़े-बड़े ढांचों के बावजूद यदि लोगों को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था और योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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