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देश के 10 नेता जिनके ऊपर रेप केस
देश की संसद और विधानसभाओं में बैठे हैं महिलाओं के खिलाफ अपराध के 151 ‘सूरमा’, इनमें से 16 पर लगा है बलात्कार का गंभीर ठप्पा
‘लोकतंत्र का मंदिर’ कहे जाने वाले हमारे देश के सदन इन दिनों एक अनोखे ‘सदाचार’ से गूंज रहे हैं। महिलाओं के सम्मान में लंबे-चौड़े भाषण देने वाले और चुनावी मंचों से ‘मातृशक्ति’ के पैर धोने वाले हमारे राजनेताओं का असली ‘महिषासुर’ रूप सामने आया है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की हालिया रिपोर्ट ने देश के माथे पर ऐसा कलंक लगाया है, जिसे देखकर लगता है कि कानून बनाने वाले ही कानून की धज्जियां उड़ाने में सबसे आगे हैं।
आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि देश के लगभग 151 मौजूदा सांसद और विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में गर्व से यह माना है कि उनके खिलाफ महिलाओं से बदसलूकी और अपराध के मामले दर्ज हैं। हद तो तब हो जाती है, जब इनमें से 16 ‘माननीयों’ पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार) का गंभीर आरोप है। यानी जिन्हें जनता ने अपनी बेटियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी, वे खुद कठघरे में खड़े हैं।
बात ‘बलात्कार’ की हो, तो कोई दल पीछे नहीं!
आमतौर पर विकास, रोजगार और महंगाई पर एक-दूसरे का सिर फोड़ने वाले राजनीतिक दल इस मामले में गजब की ‘धर्मनिरपेक्षता’ और ‘समानता’ दिखाते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, देश की दो सबसे बड़ी पार्टियां सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस रेस में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। दोनों ही पार्टियों के 5-5 मौजूदा सांसदों/विधायकों पर बलात्कार के आरोप हैं। इसे कहते हैं राष्ट्र निर्माण में ‘समान भागीदारी’!
राज्यों की ‘प्रगति’, कौन सा सूबा है सबसे आगे?
अगर आपको लगता है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध में कोई एक राज्य बदनाम है, तो भौगोलिक वितरण पर नजर डालिए:
पश्चिम बंगाल: ‘मां, माटी, मानुष’ के नारे वाले इस राज्य में सबसे ज्यादा 25 ऐसे जनप्रतिनिधि हैं, जिन पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोप हैं।
आंध्र प्रदेश और ओडिशा: आंध्र प्रदेश 21 और ओडिशा इसके ठीक बाद आकर इस ‘प्रतिष्ठा’ की दौड़ में बने हुए हैं।
‘माननीयों’ की माननीय फेहरिस्त: कुछ प्रमुख चेहरे
ये वो नाम हैं जिन्होंने राजनीति के ‘अपराध तंत्र’ को एक नई ऊंचाई दी है:
राजनेता का नाम
- 1. कुलदीप सिंह सेंगर: बीजेपी उत्तर प्रदेश उन्नाव जिले के पूर्व भाजपा विधायक द्वारा जून 2017 में एक नाबालिग के साथ हुए बलात्कार और उसके बाद के आपराधिक मामलों से जुड़ा है। सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, और वे वर्तमान में जेल में बंद हैं।
2. अमानतुल्ला खान: आम आदमी पार्टी दिल्ली में रिश्तेदार ने यौन उत्पीड़न का केस दर्ज कराया था। इसके बाद उन्होंने खुद पुलिस के सामने सरेंडर किया था। बाद में अदालत में महिला ने उन पर उत्पीड़न के आरोप लगाए, और इस मामले में उन्हें जमानत मिल गई थी।
3.मनोज कुमार पारस: सपा उत्तर प्रदेश एक दशक से अधिक समय से सामूहिक बलात्कार का मामला लंबित।
4.अनूप सांडा: सपा उत्तर प्रदेश बलात्कार, धमकी देने और बंधक बनाने का आरोप।
5.जेठाभाई जी. अहीर: BJP गुजरात चुनावी हलफनामे में खुद बलात्कार के आरोपों की घोषणा की।
7.मुनिरत्ना: बीजेपी कर्नाटक 2024 में बलात्कार सहित कई अपराधों के लिए चार्जशीट दाखिल।
8.विनय कुलकर्णी: कांग्रेस कर्नाटक 2024 के अंत तक अपहरण और बलात्कार के आरोप।
9.गोनुगुंटला सूर्यनारायण: TDP आंध्र प्रदेश हलफनामे में बलात्कार के आरोपों की जानकारी दी।
10.गुलाब यादव: राजद बिहार ADR की रिपोर्ट में बलात्कार के आरोपी के रूप में दर्ज।
11.कंडिकुंटा वेंकट प्रसाद: टीडीपी आंध्र प्रदेश बलात्कार और हत्या सहित कई संगीन आरोप।
12.मोहम्मद अलीम खान: बसपा उत्तर प्रदेश चुनाव निगरानी संस्थाओं की रिपोर्ट में बलात्कार के आरोपी।
13.एम. विंसेंट: कांग्रेस केरल 2017 में महिला के उत्पीड़न और बलात्कार के आरोप में गिरफ्तारी।
‘दाग अच्छे हैं, अगर वो राजनीतिक हों’
भारत की जनता आज भी इस मुगालते में है कि न्यायपालिका उन्हें न्याय देगी। लेकिन जब कानून के रखवाले ही कानून को अपनी जेब में रखकर विधानसभाओं की मखमली कुर्सियों पर बैठते हैं, तो जनता सिर्फ ‘तारीख पर तारीख’ गिनती है। यह देखना दिलचस्प है कि पार्टियां टिकट देते समय ‘जीतने की क्षमता’ देखती हैं, भले ही उस क्षमता के पीछे किसी महिला की चीखें ही क्यों न दबी हों। अब देखना यह है कि क्या ये दल इन ‘बाहुबलियों’ से दूरी बनाएंगे या अगले चुनाव में इन्हें फिर से ‘जनता का सेवक’ बनाकर हमारे सामने पेश कर दिया जाएगा।

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