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जयपुर में गहराया जल संकट, गंदा पानी पीने से बच्चे अस्पताल में भर्ती
जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में पेयजल संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है। एक तरफ जहाँ आज से ‘नौतपा’ की शुरुआत के साथ ही पारा 48° से 50° को छू रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहर की एक बड़ी आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। पानी की किल्लत और दूषित आपूर्ति से नाराज सिविल लाइंस और सुशीलपुरा सहित कई इलाकों के नागरिक सोमवार को सड़कों पर उतर आए। पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के नेतृत्व में आक्रोशित जनता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जलदाय विभाग के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया और सड़क पर मटके फोड़कर सोई हुई भजनलाल सरकार को जगाने का प्रयास किया।
‘रोटी, पानी न बिजली, मेलोनी संग मेलोडी खा रही सरकार’
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं और स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा तंज कसते हुए प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए। एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा, “देश में न रोटी है, न पानी है, न बिजली है, और सरकार को सिर्फ ‘मेलोडी’ खानी है। जनता यहाँ पानी के लिए त्राहिमाम कर रही है और प्रधानमंत्री विदेश जाकर सेल्फी ले रहे हैं।” प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार को आम जनता की मूलभूत सुविधाओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है।
सीवरेज का दूषित पानी पीने को मजबूर लोग, बच्चे पहुंचे अस्पताल
जल संकट से भी बदतर स्थिति यह है कि जयपुर के कई इलाकों में पीने के पानी की पाइपलाइनों में सीवरेज का गंदा पानी मिक्स होकर आ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मलमूत्र मिश्रित यह दूषित पानी पीने के कारण घरों में बीमारियाँ फैल रही हैं। सुशीलपुरा की एक महिला ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई, हमारे घर के 10 लोग गंदा पानी पीने से बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हैं। बच्चों को उल्टी-दस्त की शिकायत है। सरकारी व्यवस्थाएं फेल हैं, हमें निजी अस्पतालों में अपने पैसे खर्च कर इलाज कराना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के भाजपा विधायक गोपाल शर्मा कुछ दिन पहले खुद इस दूषित पानी को सूंघकर गए थे, लेकिन जनता को इस संकट से निजात दिलाने के लिए उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया।

₹500 से ₹2000 तक वसूल रहा टैंकर माफिया
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकारी टैंकर जो मुफ्त मिलने चाहिए, वे आम जनता को नसीब नहीं हो रहे हैं। जलदाय विभाग के अधिकारियों और टैंकर माफियाओं की मिलीभगत के कारण पानी की कृत्रिम किल्लत पैदा की गई है। एक निजी टैंकर के लिए ₹500 से लेकर ₹2000 तक की मनमानी वसूली की जा रही है। जनता का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के दाम तो पहले ही आसमान छू रहे थे, अब पानी भी पेट्रोल के भाव बिकने लगा है। गरीब आदमी रोज कुआं खोदता है, वह पानी के लिए ₹2000 कहाँ से लाएगा?

बीसलपुर बांध में पर्याप्त पानी, फिर भी सप्लाई ठप
पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने सरकार की प्रशासनिक विफलता को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राजस्थान के बीसलपुर बांध में जनता की आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त पानी मौजूद है। इसके बावजूद सरकार के पास कोई ‘कंटेंसी प्लान’ नहीं है। गर्मी आने से पहले कोई तैयारी नहीं की गई। भाजपा के विधायक और पार्षदों ने आपसी तालमेल की कमी और लापरवाही के कारण स्थानीय बोरिंग भी बंद करवा दिए हैं। खाचरियावास ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तुरंत साफ पानी की व्यवस्था नहीं की, तो मुख्यमंत्री आवास का पानी बंद कर दिया जाएगा।

राम के नाम पर ठगा जा रहा है
प्रदर्शन में शामिल अन्य नागरिकों ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावों में सनातन धर्म और राम मंदिर के नाम पर वोट मांगे गए, लेकिन जब जनता को जीवन जीने के लिए पानी चाहिए, तो सरकार गायब है। नागरिकों ने कहा, राम हमारे दिल में हैं, लेकिन राम के नाम पर जनता को मूलभूत सुविधाओं से महरूम रखना सरासर धोखा है। जो सरकार पानी नहीं दे सकती, उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
प्रदर्शनकारियों ने इस भीषण जल संकट की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत से तुरंत इस्तीफे की मांग की है। नौतपा की इस जानलेवा गर्मी में यदि जलदाय विभाग ने सुध नहीं ली, तो यह जन-आंदोलन पूरे राजस्थान में उग्र रूप ले सकता है।
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