देश
हापुड़ एसडीएम कार्यालय में ‘शीतल जल पियाऊ’ बना शोपीस, भीषण गर्मी में लोगों को पीना पड़ रहा गर्म पानी
हापुड़ | भीषण गर्मी के बीच लोगों को राहत देने के लिए लगाए गए वाटर कूलर अब खुद बदहाली की तस्वीर बन चुके हैं। हापुड़ के एसडीएम कार्यालय और कोर्ट कैंपस परिसर में लगा “शीतल जल पियाऊ” महीनों से खराब पड़ा है, जिससे यहां आने वाले हजारों लोगों को गर्म पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
कोर्ट कैंपस में रोजाना बड़ी संख्या में वादकारी, अधिवक्ता और आम नागरिक पहुंचते हैं। लेकिन परिसर में लगा वाटर कूलर या तो पूरी तरह बंद है या फिर उससे गर्म और अशुद्ध पानी निकल रहा है। भीषण गर्मी में यह स्थिति लोगों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन गई है।
वाटर कूलर की हालत जर्जर
स्थल पर मौजूद वाटर कूलर की स्थिति बेहद खराब दिखाई दी। मशीनरी काम नहीं कर रही, पंखे बंद पड़े हैं, टोटियां टूटी हुई हैं और अंदर जाले लगे हुए हैं। ऊपर का हिस्सा खुला होने से धूल-मिट्टी भी अंदर जा रही है।
“शीतल जल पियाऊ” लिखा होने के बावजूद लोगों को न ठंडा पानी मिल रहा है और न ही स्वच्छ पेयजल।

‘सिर्फ नाम का शीतल जल’
स्थानीय अधिवक्ताओं ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। अधिवक्ता शिव कुमार ने बताया कि परिसर में करीब सात-आठ अदालतें संचालित होती हैं और प्रतिदिन हजारों लोग यहां आते हैं, लेकिन महीनों से वाटर कूलर खराब पड़ा है। उन्होंने कहा कि गर्मी के कारण कुछ दिन पहले एक वादकारी की तबीयत भी बिगड़ गई थी।
वहीं अधिवक्ता पवन शर्मा ने कहा,
“यहां सिर्फ नाम का शीतल जल रह गया है। पानी पीने योग्य तो दूर, देखने योग्य भी नहीं है। लोग घर से पानी लाने को मजबूर हैं।”
गर्म पानी पीने को मजबूर लोग
46 डिग्री तापमान के बीच लोग गर्म पानी पीने को मजबूर हैं। कई लोगों ने बताया कि सुबह से घंटों इंतजार के बावजूद उन्हें ठंडा पानी नहीं मिला।
एक फरियादी ने कहा कि वह सुबह 9 बजे से कोर्ट परिसर में मौजूद है, लेकिन पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।
एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उन्हें बाहर से पानी की बोतल खरीदनी पड़ रही है, क्योंकि परिसर में उपलब्ध पानी पीने लायक नहीं है।
सीटिंग और बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव
लोगों का कहना है कि परिसर में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है। बाहर से आने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और वादकारियों को गर्मी में घंटों खड़े रहना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि परिसर में अतिरिक्त वाटर कूलर लगाए जाएं और खराब मशीनों की तत्काल मरम्मत कराई जाए।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं का कहना है कि जब सरकार जनता की सुविधा के लिए लाखों रुपये खर्च कर वाटर कूलर लगाती है, तो उनकी नियमित देखरेख और रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
फिलहाल, कोर्ट कैंपस में लगा यह “शीतल जल पियाऊ” लोगों को राहत देने के बजाय प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयान करता नजर आ रहा है।
भीषण गर्मी के इस दौर में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हापुड़ एसडीएम कार्यालय और कोर्ट परिसर में खराब पड़े वाटर कूलर यह दिखाते हैं कि योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन उनकी निगरानी और रखरखाव के अभाव में आम जनता को उसका लाभ नहीं मिल पाता।
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