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पटना कॉलेज गेट पर बवाल: TRE-4 विज्ञापन की मांग कर रहे छात्रों पर फिर बरसी पुलिस, कई हिरासत में

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पटना। एक बार फिर शिक्षक अभ्यर्थियों के आंदोलन और पुलिसिया कार्रवाई का गवाह बनी। बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण के विज्ञापन और त्वरित नोटिफिकेशन की मांग को लेकर पटना कॉलेज गेट पर प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों छात्रों को पुलिस ने खदेड़ दिया। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कई छात्र-छात्राओं को पुलिस ने जबरन खींचकर गाड़ियों में भरा और हिरासत में ले लिया।
विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने पुलिस की इस कार्रवाई की तीखी आलोचना की है। छात्रों का आरोप है कि पिछले 8 तारीख को हुए प्रदर्शन में भी उन पर बेरहमी से लाठियां बरसाई गई थीं, और आज एक बार फिर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने पर उन्हें प्रताड़ित किया गया।

हम आतंकवादी नहीं, बेरोजगार हैं

आंदोलन कर रहे छात्र अजीत कुमार और उनके साथियों ने सरकार की इस दमनकारी नीति पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। एक प्रदर्शनकारी छात्र ने अपने शरीर पर आए चोट के निशानों को दिखाते हुए कहा, यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि तानाशाही है। सड़क पर उतरकर हमें अपनी बात रखने के लिए 5 मिनट भी नहीं दिए जा रहे हैं। हमें घसीटा जा रहा है, बूटों से कुचला जा रहा है। अगर पुलिस व्यवस्था इतनी मुस्तैद नोटिफिकेशन जारी करने में दिखाई जाती, तो आज युवा सड़कों पर नहीं, स्कूलों में पढ़ा रहे होते।
छात्रों ने शासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षाओं के घोटालेबाज खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन अपने हक के लिए आवाज उठाने वाले युवाओं को अपराधी या आतंकवादी की तरह ट्रीट किया जा रहा है।

2 साल से आश्वासन का खेल, जमीन गिरवी रखकर पढ़ रहे युवा

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सभी बी.एड , सीटीईटी और अन्य जरूरी योग्यताएं पास करके बैठे हैं। पिछले दो साल से सरकार केवल ‘जल्द’ और ‘शीघ्र’ का आश्वासन देकर नोटिफिकेशन को टाल रही है।
एक अन्य छात्र ने भावुक होते हुए कहा, “पटना में रहकर तैयारी करने का खर्च उठाना अब मुमकिन नहीं रहा। कई छात्र जमीन और गहने गिरवी रखकर यहां पढ़ाई कर रहे हैं। हम कोई खैरात नहीं मांग रहे, हम सिर्फ सरकार के वादे के मुताबिक बहाली की मांग कर रहे हैं।

नई सरकार और नए मंत्रियों से भी टूटी उम्मीद

बिहार की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के आने से छात्रों को जो उम्मीदें थीं, वे अब धूमिल होती दिख रही हैं। छात्रों का कहना है कि सिर्फ चेहरे बदले हैं, व्यवस्था और रवैया वही पुराना है। इसके अलावा, राज्य के शिक्षा मंत्री द्वारा हाल ही में महिलाओं के आंदोलन में शामिल होने को लेकर दिए गए कथित बयानों पर भी छात्राओं ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे देश की ‘नारी शक्ति’ का अपमान बताया।

जेपी आंदोलन की दी चेतावनी

पुलिस प्रशासन और लाठियों के डर को खारिज करते हुए अभ्यर्थियों ने साफ कहा कि बेरोजगार युवा अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। छात्रों ने चेतावनी दी, यह सरकार हमें लाठी और जेल के डर से पीछे नहीं धकेल सकती। इन्हें 1974 का जेपी आंदोलन याद रखना चाहिए, जिसकी शुरुआत इसी पटना की धरती से छात्रों ने की थी और तत्कालीन सत्ता को उखाड़ फेंका था। अगर जल्द ही चौथे चरण का आधिकारिक विज्ञापन जारी नहीं हुआ, तो यह आंदोलन जिला स्तर पर फैलेगा और सरकार को इसका खामियाजा भुगतना होगा।
फिलहाल, पटना कॉलेज और एनआईटी घाट के आसपास के इलाकों को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

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