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अस्पताल या कबाड़खाना? वेंटिलेटर पर सिमरी का आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र, जर्जर भवन और कूड़े के ढेर के बीच इलाज को मजबूर ग्रामीण
बक्सर। सरकार एक तरफ आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों के फंड जारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर बक्सर जिले के सिमरी प्रखंड का प्राथमिक आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र खुद अपनी ‘बीमारी’ से जूझ रहा है। ग्राउंड जीरो पर की गई पड़ताल में यह अस्पताल किसी स्वास्थ्य केंद्र के बजाय एक बदहाल कबाड़खाना और कूड़ाघर नजर आता है। अस्पताल की स्थिति ऐसी है कि जो संस्थान लोगों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाता है, वह खुद गंदगी और अव्यवस्था के वेंटिलेटर पर लेटा हुआ है।

आयुर्वेद के मंदिर में अंग्रेजी दवाओं का ‘अवैध’ अंबार
अस्पताल के मुख्य गेट से प्रवेश करते ही जो नजारा दिखता है, वह चौंकाने वाला है। आयुर्वेदिक अस्पताल होने के बावजूद यहाँ भारी मात्रा में अंग्रेजी दवाएं लावारिस हालत में बिखरी पड़ी हैं। इनमें से अधिकांश दवाएं एक्सपायरी (समाप्त तिथि) हो चुकी हैं। एक तरफ गरीबों को सरकारी अस्पतालों में दवाएं नसीब नहीं होतीं, वहीं यहाँ सरकारी टैक्स के पैसे से खरीदी गई दवाओं को रद्दी और कचरे के भाव में फेंक दिया गया है।
सिस्टम की नाकामी: स्टाफ की कमी और लटके ताले
अस्पताल की सुर्खियों में रहने की मुख्य वजह यहाँ डॉक्टरों और स्टाफ की अनुपस्थिति है।
ओपीडी पर ताला: अस्पताल का ओपीडी कक्ष बंद रहता है, जिससे दूर-दराज से आने वाले मरीज बिना इलाज के लौटने को मजबूर हैं।
डॉक्टर का पक्ष: केंद्र पर तैनात डॉक्टर उमेश कुमार का कहना है कि स्टाफ की भारी कमी है। मार्च-अप्रैल जैसे महीनों में विशेष सरकारी कार्यक्रमों के कारण डॉक्टर फील्ड में रहते हैं, जिससे अस्पताल में ताला लटका रहता है।
जर्जर रिकॉर्ड: अस्पताल के महत्वपूर्ण रजिस्टर और दस्तावेज जमीन पर धूल फांक रहे हैं।

भवन की हालत: कब गिर जाए, कोई ठिकाना नहीं
अस्पताल की बिल्डिंग किसी भी वक्त बड़े हादसे को दावत दे सकती है। छत का प्लास्टर गिर रहा है और दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं। यहाँ काम करने वाले कर्मी भी खौफ के साए में रहने को मजबूर हैं।
हमे यहाँ काम करते हुए डर लगता है, यह बिल्डिंग कभी भी गिर सकती है। हालांकि इसे बनाने का प्रस्ताव कागजों में दिया गया है, पर धरातल पर कुछ नहीं हुआ।

सीसीटीवी की नजर में ‘सिस्टम की गंदगी’
अस्पताल परिसर में चारों ओर गंदगी का अंबार लगा है, जिससे मलेरिया और डायरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। भवन में सीसीटीवी कैमरे तो लगे हैं, लेकिन वे सिस्टम की सुरक्षा के बजाय उसकी नाकामी को रिकॉर्ड कर रहे हैं। कबाड़ संग्रह केंद्र से लेकर स्टोर रूम तक सब कुछ अव्यवस्थित है। यह अस्पताल सरकारी फंड और जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। अब देखना यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटती है या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा है।
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