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सूरत के कतारगाम में 200 से अधिक घरों पर चला बुलडोजर, बेघर हुए परिवारों ने उठाए प्रशासन पर सवाल
सूरत। सूरत के कतारगाम क्षेत्र स्थित नाशी नगर में 200 से अधिक मकानों पर हुई ध्वस्तीकरण कार्रवाई के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि वे दशकों से इस क्षेत्र में रह रहे थे, लेकिन उन्हें पर्याप्त नोटिस और वैकल्पिक व्यवस्था के बिना बेघर कर दिया गया। ध्वस्तीकरण के बाद बड़ी संख्या में परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने प्रशासन से पुनर्वास और आवास की मांग की है। प्रभावित लोगों का कहना है कि उनके घरों के साथ-साथ घरेलू सामान भी मलबे में दब गया।

चुनाव के बाद कार्रवाई पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने कार्रवाई के समय को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हाल ही में नगर निकाय चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों के नेता इसी क्षेत्र में वोट मांगने आए थे, लेकिन तब इन मकानों की वैधता पर कोई सवाल नहीं उठाया गया। निवासियों का आरोप है कि वर्षों से यहां सड़क, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती रहीं, जिससे उन्हें यह विश्वास था कि उनका निवास वैध माना जा रहा है। ऐसे में अचानक हुई ध्वस्तीकरण कार्रवाई ने लोगों को असमंजस और संकट में डाल दिया है।

40-50 साल से रह रहे थे, अब कहां जाएं?
प्रभावित परिवारों का कहना है कि कई लोग पिछले 40 से 50 वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे थे। एक महिला ने बताया कि कार्रवाई के दौरान उनका घरेलू सामान, बच्चों की आवश्यक वस्तुएं और शादी के लिए रखा गया सामान तक मलबे में दब गया। कई परिवारों ने दावा किया कि उन्हें कार्रवाई से पहले पर्याप्त समय नहीं दिया गया और अचानक बुलडोजर पहुंचने से वे अपना सामान तक सुरक्षित नहीं निकाल सके।

नोटिस और प्रक्रिया को लेकर विवाद
ध्वस्तीकरण को लेकर सबसे बड़ा विवाद नोटिस और कानूनी प्रक्रिया को लेकर सामने आया है। प्रभावित निवासियों का आरोप है कि उन्हें उचित नोटिस नहीं दिया गया। कुछ लोगों का दावा है कि उन्होंने पहले भी संबंधित विभागों को आवेदन देकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने और समाधान निकालने की मांग की थी, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इस मामले में प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे मामले को न्यायालय तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
पुनर्वास की मांग हुई तेज
ध्वस्तीकरण के बाद प्रभावित परिवारों की मुख्य मांग पुनर्वास को लेकर है। उनका कहना है कि यदि मकानों को हटाना आवश्यक था, तो पहले वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जानी चाहिए थी।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि वे सरकार और प्रशासन से घर के बदले घर की मांग कर रहे हैं ताकि बेघर हुए परिवारों को स्थायी राहत मिल सके।
प्रशासनिक कार्रवाई पर बहस
कतारगाम की यह घटना एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, पुनर्वास नीति और मानवीय दृष्टिकोण को लेकर बहस का विषय बन गई है। जहां प्रशासन ऐसी कार्रवाइयों को शहर नियोजन और विकास से जोड़कर देखता है, वहीं प्रभावित परिवारों का कहना है कि विकास के नाम पर उनकी आजीविका और आशियाने को नुकसान पहुंचाया गया है। अब सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई, संभावित पुनर्वास योजना और इस मामले में होने वाली कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई है।

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