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विधानमंडल से कुछ कदम दूर ‘विकास’ बेपटरी, 50 साल से खुले नाले और गंदे पानी में जीने को मजबूर अंबेडकर कॉलोनी
पटना। बिहार की राजधानी पटना को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे किए जा रहे हैं। शहर में बड़े-बड़े सरकारी भवन, आधुनिक सड़कें और विकास के नए प्रतीक खड़े हो रहे हैं, लेकिन इन्हीं दावों के बीच गर्दनीबाग स्थित अंबेडकर कॉलोनी की तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। बिहार विधानमंडल और प्रमुख राजनीतिक दलों के कार्यालयों से कुछ ही दूरी पर स्थित इस बस्ती में आज भी लोग खुले नालों, गंदे पानी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं।

’50 साल से खुला है नाला, सफाई तक नहीं होती’
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां पिछले कई दशकों से नाले खुले पड़े हैं और उनकी नियमित सफाई नहीं होती। बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। नालों में जमा गंदगी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे बीमारियों का खतरा बना रहता है। बस्ती में रहने वाली एक महिला ने बताया, “यह नाला करीब 50 साल से खुला है। सफाई नहीं होती। गंदगी और बदबू हमेशा रहती है। मच्छर इतने होते हैं कि बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक अक्सर बीमार पड़ जाते हैं।”
नल-जल योजना पर सवाल, ‘पानी आता भी है तो गंदा’
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की कई योजनाओं का लाभ अब तक बस्ती तक नहीं पहुंच पाया है। लोगों ने दावा किया कि नल-जल योजना के तहत लगाए गए नलों में या तो पानी नहीं आता या फिर पानी इतना गंदा होता है कि पीने योग्य नहीं रहता। मजबूरी में लोग बोरिंग के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “सरकारी नल आने की बात तो कई सालों से सुन रहे हैं, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है। अगर पानी आता भी है तो इतना गंदा कि पीना मुश्किल हो जाता है।”

आवास योजना का लाभ नहीं मिलने का आरोप
बस्ती में आवास योजना को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ यहां के अधिकांश परिवारों को नहीं मिला। कई परिवार आज भी झोपड़ियों में रह रहे हैं और बारिश या तेज हवा के समय उन्हें अपने आशियाने के टूटने का डर सताता है। लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय नेता वोट मांगने जरूर आते हैं, लेकिन इसके बाद उनकी समस्याओं की सुध लेने कोई नहीं पहुंचता। एक बुजुर्ग महिला ने नाराजगी जताते हुए कहा, “नेता लोग वोट लेने आते हैं, हाथ जोड़ते हैं, लेकिन जीतने के बाद कोई यहां नहीं आता।”
बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर भी असर
बस्ती में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य भी चिंता का विषय है। एक छात्रा ने बताया कि यहां शौचालय और साफ-सफाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गंदगी और दूषित पानी के कारण बच्चों में बीमारी का खतरा लगातार बना रहता है।
एक तरफ चमकता पटना, दूसरी तरफ संघर्ष करती बस्ती
विडंबना यह है कि जिस अंबेडकर कॉलोनी में लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उसके ठीक दूसरी ओर बिहार विधानमंडल, बड़े सरकारी कार्यालय और स्मार्ट सिटी के तहत विकसित हो रहे इलाके मौजूद हैं। एक तरफ चमकता हुआ पटना नजर आता है, तो दूसरी तरफ विकास की मुख्यधारा से कटी यह बस्ती।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब राजधानी के बीचों-बीच स्थित एक बस्ती तक सरकारी योजनाओं का लाभ पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है, तो विकास के दावों की वास्तविक तस्वीर आखिर क्या है? अंबेडकर कॉलोनी के लोगों की उम्मीद आज भी उसी जवाब का इंतजार कर रही है।

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