Connect with us

देश

आजादी के 79 साल बाद भी अंधेरे में बनलही टोला, न बिजली पहुंची न साफ पानी

Published

on

WhatsApp Image 2026 06 22 at 16.46.40

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की मारकुंडी ग्राम पंचायत का बनलही टोला आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। यहां पहुंचने के लिए करीब पांच से साढ़े पांच किलोमीटर तक दुर्गम पहाड़ी रास्तों और कच्ची सड़कों से होकर गुजरना पड़ता है। गांव तक पहुंचते ही हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता तो नजर आती है, लेकिन ग्रामीणों की समस्याएं इस खूबसूरती पर भारी पड़ती दिखाई देती हैं।

गांव में बिजली का एक भी पोल नहीं
बनलही टोला की सबसे बड़ी समस्या बिजली है। गांव में बिजली का एक भी पोल दिखाई नहीं देता। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी यहां बिजली नहीं पहुंच सकी है। कुछ परिवारों ने छोटे-छोटे सोलर पैनल लगाए हैं, जिनकी मदद से मोबाइल चार्ज कर लेते हैं। यदि सोलर पैनल डिस्चार्ज हो जाए तो लोगों को बाजार जाकर मोबाइल चार्ज कराना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से बिजली की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।

तीन किलोमीटर दूर से लाना पड़ता है पानी
गांव में पेयजल की स्थिति भी बेहद खराब है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के अधिकांश हैंडपंप खराब पड़े हैं और कुओं की स्थिति भी ठीक नहीं है। ऐसे में महिलाएं और पुरुष करीब तीन किलोमीटर दूर जाकर नदी या बरसात के जमा पानी को लाने के लिए मजबूर हैं। गांव की निवासी सोनमतिया बताती हैं, साफ पानी की सुविधा आज तक नहीं मिली। जो पानी मिलता है, वह गंदा और पीले रंग का होता है। मजबूरी में वही पीना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के दौरान जमा होने वाला पानी ही सालभर पीने और घरेलू उपयोग के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिससे बीमारियों का खतरा बना रहता है।

सड़क नहीं, मरीजों को खटोले पर ले जाना पड़ता है
गांव में सड़क और परिवहन की कमी का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि रात में कोई बीमार पड़ जाए या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो तो उसे खटोले पर लादकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। एक ग्रामीण ने बताया, “गाड़ी गांव तक नहीं पहुंचती। अगर कोई ज्यादा बीमार हो जाए तो चार लोग खटोला उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाते हैं, उसके बाद ही अस्पताल पहुंचना संभव हो पाता है।”

उज्ज्वला और आवास योजना का लाभ नहीं मिलने का दावा
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के अधिकांश परिवारों को न तो उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिला है और न ही प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ। आज भी कई परिवार कच्चे मकानों और झोपड़ियों में रहते हैं तथा लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाते हैं। हालांकि कुछ परिवारों को आवास योजना का लाभ मिला है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि बड़ी संख्या में लोग अभी भी सरकारी योजनाओं से वंचित हैं।

स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र की भी कमी
गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों के मुताबिक, आसपास कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सरकारी क्लीनिक नहीं है। इलाज के लिए उन्हें कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। शिक्षा के क्षेत्र में भी हालात बेहतर नहीं हैं। बच्चों को पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

विकास के दावों के बीच सवाल
करीब 150 घरों और सैकड़ों की आबादी वाले बनलही टोला की स्थिति विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है। बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण आज भी कठिन परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द गांव में बिजली, स्वच्छ पेयजल, पक्की सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए, ताकि उन्हें भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

Continue Reading
Click to comment

You must be logged in to post a comment Login

Leave a Reply

Advertisement

Trending

Copyright © 2025 Batangarh. Designed by ❤️ TrafficRaid.com