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लहरतारा में बुलडोजर की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: आशियाने उजड़े, उम्मीदें टूटीं और आक्रोश में बदली वफादारी
वाराणसी | लहरतारा-बौलिया इलाका, जिसे कभी भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य ‘गढ़’ कहा जाता था, आज मलबे के ढेर और चीख-पुकार का केंद्र बना हुआ है। पीडब्ल्यूडी द्वारा सड़क चौड़ीकरण के लिए की गई अचानक कार्रवाई ने लगभग 45 परिवारों को बेघर कर दिया है। कार्रवाई इतनी तेज थी कि कई लोगों को अपने घर से जरूरी सामान, दवाइयां और यहां तक कि चूल्हा-चौका निकालने तक की मोहलत नहीं मिली।
जब नाले के नाम पर गिराए गए घर

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें गुमराह किया। एक पीड़ित महिला ने सुबकते हुए बताया, “एक दिन पहले कहा गया कि सिर्फ नाला साफ करना है, जगह खाली कर दीजिए। लेकिन सुबह 6:00 बजे जब आंख खुली, तो सामने तीन-तीन बुलडोजर खड़े थे। नाला तो साफ नहीं हुआ, सीधे हमारे घरों पर प्रहार शुरू कर दिया गया।
लोगों का कहना है कि पक्के निर्माण को हटाने के लिए कम से कम 24 से 48 घंटे का समय दिया जाना चाहिए था, लेकिन यहाँ तानाशाही का आलम यह था कि लोग घर के अंदर ही थे और बुलडोजर चलने लगे।
मुआवजे की आस और ‘सिक्स लेन’ का भ्रम
क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर लंबे समय से संशय बना हुआ था। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले सिक्स लेन का प्रस्ताव था, जिसे विरोध के बाद रद्द करने का आश्वासन मिला था।
अस्पष्ट पैमाइश: लोगों का आरोप है कि विभाग ने तीन-चार बार नापी की, जिसमें हर बार आंकड़े अलग थे। कहीं 2 मीटर की बात हुई, तो कहीं 9 मीटर तक घर तोड़ दिए गए।
शून्य मुआवजा: सबसे बड़ा दर्द मुआवजे का है। एक दुकानदार, जिसकी जूते-चप्पल की दुकान जमींदोज हो गई, ने कहा, पीला कार्ड दिया गया, कागज लिए गए और मुआवजे का वादा किया गया। लेकिन आज एक रुपया नहीं मिला और रोजी-रोटी छीन ली गई।
आस्था और मानवता पर प्रहार
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान मलबे में बिखरी मूर्तियां और घरेलू सामान प्रशासन की संवेदनहीनता की कहानी बयां कर रहे थे। एक महिला ने रोते हुए बताया कि उसकी बेटी गंभीर रूप से बीमार है और ऑक्सीजन पर है, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने सामान तक सुरक्षित निकालने का समय नहीं दिया। यहाँ तक कि घरों में स्थापित छोटे मंदिरों और मूर्तियों को भी नहीं बख्शा गया।
राजनीतिक गढ़ में ‘कमल’ से मोहभंग?
इस कार्रवाई का सबसे गहरा असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है। सालों से भाजपा के कट्टर समर्थक रहे इस इलाके के लोगों में अब भारी आक्रोश है। मैं स्टैम्प पेपर पर लिख के दे सकता हूँ, जिसके घर पर बुलडोजर चला है, वो कभी भाजपा को वोट नहीं देगा। हम सपने में भी कमल का फूल दबाते थे, लेकिन अब सब भूल जाएंगे।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह निर्माण अवैध था और सड़क चौड़ीकरण जनहित में आवश्यक है। नोटिस पहले ही चस्पा किए गए थे। हालांकि, जनता के “बिना मोहलत और बिना मुआवजे” के आरोपों पर फिलहाल कोई ठोस आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
मलबे में भविष्य की तलाश

आज लहरतारा की सड़कों पर ईंटों के ढेर हैं और उन ढेरों पर बैठे वे लोग हैं जो कल तक इसी छत के नीचे अपना भविष्य बुन रहे थे। कोई अपना पंखा ढूंढ रहा है, तो कोई मलबे से अनाज निकालने की कोशिश कर रहा है। विकास की इस दौड़ में ‘बनारस के बसिंदों’ का यह दर्द एक बड़ा सवाल खड़ा करता है क्या विकास की कीमत गरीब की छत छीनकर ही चुकाई जाएगी?

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