देश
सुल्तानपुरी का नरक: नलों से टपकता ‘कीचड़’, आसमान छूती महंगाई और गलियों में घूमती मौत
नई दिल्ली | सुल्तानपुरी इलाका इन दिनों नागरिक सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक संवेदनहीनता का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। एक तरफ जहां देश में महिला आरक्षण और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सुल्तानपुरी की महिलाएं अपनी बुनियादी जरूरतों साफ पानी, सुरक्षा और सस्ते ईंधन के लिए सड़क पर उतरकर चीखने को मजबूर हैं।
नल में पानी नहीं, ‘गटर’ का जहर
सुल्तानपुरी की गलियों में रहने वाली महिलाओं का आक्रोश सातवें आसमान पर है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पिछले एक हफ्ते से नलों में पानी ही नहीं आ रहा है, और जब आता है तो वह पीने लायक तो दूर, नहाने लायक भी नहीं होता।
भयावह स्थिति: महिलाओं ने बताया कि नलों से काला कीचड़ और गटर का बदबूदार पानी आ रहा है।
नवजात पर संकट: एक बुजुर्ग महिला ने रोते हुए बताया, मेरी बहू को बच्चा हुआ है। इलाके में गंदा पानी आने के कारण वह एक हफ्ते से नहा नहीं पाई है। हम बाहर से पानी खरीदकर ला रहे हैं और उसी से एक महीने के बच्चे के कपड़े धोने को मजबूर हैं।
आर्थिक बोझ: साफ पानी न आने के कारण लोग ₹20 वाली पानी की बोतलें खरीदने को मजबूर हैं, जबकि सरकार की ओर से उन्हें ₹5,000 से ₹10,000 तक के पानी के भारी-भरकम बिल थमाए जा रहे हैं।
सुरक्षा का अभाव: छोटी उम्र के हाथों में चमकते चाकू
इलाके में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। महिलाओं का आरोप है कि सुल्तानपुरी ‘चाकूबाजी’ का अड्डा बन गया है। छोटी-सी कहासुनी पर नाबालिग लड़के चाकू निकाल लेते हैं।
ताजा घटना: हाल ही में जलेबी चौक के पास एक बच्चे की चाकू मारकर हत्या कर दी गई।
प्रशासन की ढील: स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस अपराधियों को पकड़ती तो है, लेकिन कम उम्र का हवाला देकर वे जल्द ही जेल से बाहर आ जाते हैं और फिर से वारदातों को अंजाम देते हैं। लोग अब अपने बच्चों को बाहर भेजने से भी डरने लगे हैं।
महंगाई की मार: ₹4000 में ‘ब्लैक’ में सिलेंडर
केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं पर सवाल उठाते हुए महिलाओं ने कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे नारे खोखले साबित हो रहे हैं।
उज्ज्वला का सच: कनेक्शन होने के बावजूद गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहा है। मजबूरी में महिलाओं को ₹3,000 से ₹4,000 खर्च कर ब्लैक में सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है।
चूल्हे की मजबूरी: सिलेंडर न होने के कारण कई घरों में फिर से चूल्हा जलने लगा है, जिससे प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
राशन की किल्लत: सरकार द्वारा दिए जा रहे 5 किलो राशन को ऊंट के मुंह में जीरा बताते हुए महिलाओं ने कहा कि सिर्फ गेहूं से पेट नहीं भरता, दाल और तेल के दाम आसमान छू रहे हैं।
महल में बैठने वालों को क्या पता?
एक प्रदर्शनकारी महिला ने कहा, बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता एक बार आकर हमारी गलियों में घूमें। वे महलों में बैठकर बड़ी बातें करते हैं, लेकिन यहां हम कीचड़ वाले पानी से नहाने और गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। ऐसी सरकार हमारे किस काम की जो हमें सम्मान से जीने का हक भी न दे सके?
सुल्तानपुरी की यह स्थिति शासन-प्रशासन की विफलता का कच्चा चिट्ठा है। चुनावी पोस्टर और राजनीतिक भाषणों से इतर, यहाँ की ज़मीनी हकीकत बदबूदार पानी और असुरक्षित गलियों में सिमट गई है। अब देखना यह है कि क्या दिल्ली की सरकार और प्रशासन इन महिलाओं की चीख सुनता है या ये समस्याएँ फाइलों में ही दबी रह जाती हैं।
-
देश1 year agoसत्ता, पैसा और अंधविश्वास – बाबा इंडस्ट्री की असली कहानी
-
देश1 year agoन्याय के लिए डंडा खाती मां! 🚨 ममता सरकार पर सवाल | Kolkata Case
-
Blog1 year agoBageshwar Baba Exposed? 😱 Miracle ✨ या Illusion 🎭
-
एजुकेशन1 year agoखमरिया गांव की शिक्षा पर संकट: ताले में बंद प्राथमिक शाला और मधुशाला बनी माध्यमिक शाला

You must be logged in to post a comment Login