देश
राजधानी के कंकड़बाग PHC की हालत ‘भूत बंगले’ जैसी, जर्जर छत के नीचे इलाज करने को मजबूर डॉक्टर और मरीज
पटना | जिसे स्मार्ट सिटी बनाने के दावे किए जा रहे हैं, वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था की एक डरावनी तस्वीर सामने आई है। कंकड़बाग स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC) सह हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर वर्तमान में एक ऐसी जर्जर इमारत में चल रहा है, जिसे पहली नजर में देखने पर ‘भूत बंगला’ कहना गलत नहीं होगा।
पिलर फटे, छत से गिर रहा प्लास्टर

अस्पताल की इमारत की स्थिति इतनी भयावह है कि इसके पिलर पूरी तरह फट चुके हैं और सरिया बाहर नजर आ रहा है। स्थानीय निवासियों और वहां आने वाले मरीजों का कहना है कि यह बिल्डिंग 30-35 साल पुरानी है और कभी भी भरभरा कर गिर सकती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसी जर्जर छत के नीचे डॉक्टर बैठते हैं, दफ्तर चलता है और मरीज प्राथमिक उपचार के लिए आते हैं।
सुरक्षा के नाम पर केवल ‘सिक्योरिटी गार्ड’
जब मीडिया की टीम ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर हालात का जायजा लेना चाहा, तो अस्पताल प्रबंधन की ओर से भारी विरोध देखने को मिला। अंदर बैठे जिम्मेदार अधिकारी बाहर आने की हिम्मत नहीं जुटा सके, बल्कि सुरक्षाकर्मियों को आगे कर कैमरे और माइक को रोकने की कोशिश की गई। सवाल यह उठता है कि अगर व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं, तो प्रशासन को मीडिया के कैमरों से डर क्यों लग रहा है?
सुविधाओं का अभाव: न डस्टबिन, न स्ट्रेचर

अस्पताल परिसर के बाहर गंदगी का अंबार है। दवाइयों के खाली पैकेट खुले में फेंके गए हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद यहां बुनियादी सुविधाओं जैसे स्ट्रेचर, ऑक्सीजन सिलेंडर और उचित डस्टबिन का अभाव नजर आता है। बारिश के मौसम में छत से पानी टपकना यहां आम बात है।
सरकार को मुआवजा देने का इंतजार नहीं करना चाहिए। जब बिल्डिंग गिरती है तब प्रशासन जागता है। हम चाहते हैं कि कंकड़बाग की जनता के लिए जल्द से जल्द एक सुरक्षित और नई बिल्डिंग का निर्माण हो।
सरकार और स्वास्थ्य मंत्री से सीधे सवाल

विधानसभा में इस अस्पताल को लेकर चर्चाएं तो होती हैं, लेकिन धरातल पर ईंट तक नहीं रखी गई है। स्थानीय जनता का कहना है कि सरकार वोट तो लेती है, लेकिन स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरत को नजरअंदाज कर रही है। अब देखना यह है कि नए उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग के मुखिया इस ओर क्या कदम उठाते हैं। क्या इस जर्जर ‘अस्तबल’नुमा अस्पताल को एक आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र की पहचान मिल पाएगी?
-
देश1 year agoसत्ता, पैसा और अंधविश्वास – बाबा इंडस्ट्री की असली कहानी
-
देश1 year agoन्याय के लिए डंडा खाती मां! 🚨 ममता सरकार पर सवाल | Kolkata Case
-
Blog1 year agoBageshwar Baba Exposed? 😱 Miracle ✨ या Illusion 🎭
-
एजुकेशन1 year agoखमरिया गांव की शिक्षा पर संकट: ताले में बंद प्राथमिक शाला और मधुशाला बनी माध्यमिक शाला

You must be logged in to post a comment Login