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लखनऊ की ‘लाइफ लाइन’ गोमती नदी गंदगी से बेहाल, हनुमान धाम के पीछे कचरे का अंबार
उत्तर प्रदेश | लखनऊ से गुजरने वाली गोमती नदी, जिसे शहर की ‘लाइफ लाइन’ कहा जाता है, इन दिनों प्रदूषण और गंदगी की गंभीर समस्या से जूझ रही है। शहर के प्रसिद्ध हनुमान धाम मंदिर के पीछे नदी किनारे फैली गंदगी ने नदी सफाई अभियानों और प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि नदी किनारे बड़ी मात्रा में कचरा, पॉलिथीन, पूजन सामग्री और घरेलू अपशिष्ट जमा है। कई जगहों पर पानी का रंग काला दिखाई दे रहा है और दुर्गंध इतनी अधिक है कि वहां रुकना मुश्किल हो रहा है।
आस्था और गंदगी का विरोधाभास
हनुमान धाम लखनऊ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर के भीतर साफ-सफाई नजर आती है, लेकिन उसके पीछे बहने वाली गोमती नदी का दृश्य चिंता पैदा करता है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर के पीछे यदि साफ और स्वच्छ नदी हो, तो धार्मिक स्थल की गरिमा और बढ़ेगी। उनका मानना है कि आस्था के साथ-साथ पवित्रता और पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी है।

कचरे से बिगड़ रहा नदी का स्वरूप
नदी किनारे प्लास्टिक, बोरे, घरेलू सामान और पूजन सामग्री बड़ी मात्रा में देखी गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लोग जानबूझकर यहां कचरा फेंकते हैं, जबकि बहकर आने वाला कचरा भी समस्या को बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय रहते रोकथाम नहीं की गई तो गोमती नदी की स्थिति भी दिल्ली की यमुना जैसी हो सकती है।
जनस्वास्थ्य पर खतरा
गोमती नदी लखनऊ के लिए जल का महत्वपूर्ण स्रोत मानी जाती है। ऐसे में नदी का लगातार प्रदूषित होना सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य और जल गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। गंदगी और बदबू के कारण आसपास के क्षेत्रों में संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

श्रद्धालुओं ने दिखाई चिंता
मंदिर आने वाले कई श्रद्धालुओं ने कहा कि नदी की सफाई के लिए सिर्फ प्रशासन ही नहीं, बल्कि आम लोगों को भी जिम्मेदारी समझनी होगी। लोगों का कहना है कि यदि हर व्यक्ति जागरूक होकर नदी में कचरा फेंकना बंद करे, तो हालात काफी सुधर सकते हैं।
प्रशासन और नगर निगम पर सवाल
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सरकार और नगर निगम नदी सफाई अभियान के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई देती है। लोगों ने मांग की है कि नदी किनारे नियमित सफाई, कचरा प्रबंधन और निगरानी की व्यवस्था की जाए।
गोमती को बचाने की अपील
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने शासन-प्रशासन से अपील की है कि गोमती नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
गोमती नदी सिर्फ एक जलधारा नहीं, बल्कि लखनऊ की पहचान और जीवन का अहम हिस्सा है। धार्मिक आस्था, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़ी इस नदी की वर्तमान स्थिति यह संकेत दे रही है कि अब केवल योजनाओं और दावों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।

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