देश
मौत को दावत देता मीठापुर कंस्ट्रक्शन साइट: जगह-जगह टूटी बैरिकेडिंग और खुले गड्ढे, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?
पटना | बिहार की राजधानी पटना इन दिनों निर्माण कार्यों का केंद्र बनी हुई है। मेट्रो से लेकर फ्लाईओवर तक का जाल बिछाया जा रहा है, लेकिन इन विकास कार्यों के साथ सुरक्षा मानकों की जो अनदेखी की जा रही है, वह किसी बड़ी अनहोनी को खुला निमंत्रण दे रही है। ताजा मामला मीठापुर के पास कुरथौल जाने वाले मुख्य मार्ग का है, जहाँ फ्लाईओवर निर्माण के नाम पर लापरवाही की सारी हदें पार कर दी गई हैं।
बैरिकेडिंग के नाम पर सिर्फ ‘मजाक’
ग्राउंड जीरो पर ‘पतंग’ की टीम ने पाया कि निर्माण स्थल के चारों ओर की गई बैरिकेडिंग पूरी तरह ध्वस्त है। लोहे की चादरों और डिवाइडर के बीच कई फीट के बड़े अंतराल (गैप) खुले छोड़ दिए गए हैं। रात के अंधेरे में या बारिश के दौरान अगर कोई वाहन अनियंत्रित होता है, तो वह सीधे कई फीट गहरे पानी से भरे गड्ढों में जा गिरेगा। विडंबना यह है कि इन गड्ढों के भीतर नुकीले सरिया और लोहे के एंगल निकले हुए हैं, जो किसी भी दुर्घटना को जानलेवा बनाने के लिए काफी हैं।
न साइन बोर्ड, न कोई चेतावनी
नियमतः किसी भी कंस्ट्रक्शन साइट पर डायवर्जन और चेतावनी के साइन बोर्ड होना अनिवार्य है। लेकिन मीठापुर के इस साइट पर दूर-दूर तक कोई दिशा-सूचक बोर्ड नजर नहीं आता। एम्बुलेंस की आवाजाही वाले इस व्यस्त मार्ग पर यात्रियों को यह बताने वाला भी कोई नहीं है कि आगे रास्ता किधर मुड़ता है। पिलर पर सिर्फ एक छोटा सा संदेश लिखा है ‘कार्यस्थल पर बच्चों का खेलना मना है’, जबकि हकीकत यह है कि यह पूरी सड़क ही आम जनता के लिए असुरक्षित बनी हुई है।
खस्ताहाल सड़क बढ़ा रही है जोखिम
निर्माण कार्य के चलते यहाँ की सड़कें पूरी तरह उखड़ चुकी हैं और जगह-जगह कीचड़ व जल-जमाव है। ऐसी ‘अनबैलेंस्ड’ स्थिति में गाड़ियों के फिसलने का खतरा हमेशा बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और ठेका लेने वाली कंपनी शायद दिल्ली जैसे हादसों का इंतजार कर रही है, जहाँ खुले मैनहोल या कंस्ट्रक्शन साइट पर गिरने से मासूमों की जान चली जाती है।
जवाबदेही तय करना जरूरी
पूरे पटना में अभी दर्जनों जगहों पर निर्माण कार्य जारी है। मेट्रो और फ्लाईओवर के प्रोजेक्ट्स ने शहर को एक बड़ी वर्कशॉप में बदल दिया है। लेकिन सवाल यह है कि अगर इन खुले गड्ढों और आधी-अधूरी बैरिकेडिंग की वजह से किसी राहगीर की जान जाती है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? क्या सरकार और संबंधित विभाग अनहोनी के बाद ही जागेंगे?
“हादसा होने के बाद मीडिया लापरवाही गिनाने पहुँचती है, लेकिन प्रशासन को पहले ही प्रिकॉशन लेना चाहिए। मीठापुर का यह नजारा बताता है कि पटना में लोगों की जान की कीमत निर्माण कंपनी की नजर में कितनी कम है।
-
देश10 months agoसत्ता, पैसा और अंधविश्वास – बाबा इंडस्ट्री की असली कहानी
-
देश10 months agoन्याय के लिए डंडा खाती मां! 🚨 ममता सरकार पर सवाल | Kolkata Case
-
Blog10 months agoBageshwar Baba Exposed? 😱 Miracle ✨ या Illusion 🎭
-
एजुकेशन10 months agoखमरिया गांव की शिक्षा पर संकट: ताले में बंद प्राथमिक शाला और मधुशाला बनी माध्यमिक शाला

You must be logged in to post a comment Login