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यमुना किनारे बुलडोजर की दस्तक, दशकों पुराने आशियानों पर संकट

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नई दिल्ली। यमुना बाजार स्थित यमुना घाट क्षेत्र में प्रस्तावित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। प्रशासन की ओर से नोटिस जारी होने के बाद अधिकांश परिवार अपने घरों का सामान समेटने में जुट गए हैं। लोगों का कहना है कि किसी भी समय बुलडोजर कार्रवाई शुरू हो सकती है।

दशकों से रह रहे, अब बेघर होने का डर

स्थानीय निवासियों का दावा है कि वे 70 से 100 वर्षों से अधिक समय से इस इलाके में रह रहे हैं। कई परिवारों का कहना है कि उनकी कई पीढ़ियां यहीं पली-बढ़ी हैं और अब अचानक घर खाली करने के आदेश से उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है।
प्रभावित परिवारों का आरोप है कि चुनाव के दौरान झुग्गी के बदले मकान का वादा किया गया था, लेकिन उन्हें कोई वैकल्पिक आवास उपलब्ध नहीं कराया गया। कई लोगों ने बताया कि मजबूरी में वे किराये के मकान तलाश रहे हैं, जहां 10 से 20 हजार रुपये तक मासिक किराया देना पड़ रहा है।

घाट से जुड़ी आजीविका पर भी संकट

यमुना घाट पर अस्थि विसर्जन, धार्मिक अनुष्ठान, नाव संचालन और गोताखोरी जैसे कार्य करने वाले लोगों का कहना है कि उनका रोजगार पूरी तरह इस क्षेत्र पर निर्भर है। उनका तर्क है कि यदि उन्हें यहां से हटाया जाता है तो उनकी आजीविका भी प्रभावित होगी।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि यह इलाका अवैध था, तो दशकों तक यहां बिजली, पानी और अन्य सरकारी सुविधाएं क्यों उपलब्ध कराई गईं। उनका कहना है कि वर्षों तक प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की और अब अचानक उन्हें हटाया जा रहा है।

प्रशासन का कहना है कि यमुना के बाढ़ क्षेत्र में बने निर्माण लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों पर सरकारी संसाधनों का बड़ा खर्च होता है। इसी कारण यमुना के बाढ़ क्षेत्र को खाली कराया जा रहा है और वहां से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है।

अनिश्चित भविष्य के बीच इंतजार

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अभी तक पुनर्वास को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। अधिकांश घरों के बाहर बंधा हुआ सामान इस बात का संकेत है कि परिवार किसी भी समय होने वाली कार्रवाई के लिए तैयार तो हैं, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि घर टूटने के बाद वे जाएंगे कहां।

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