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उद्घाटन के कुछ दिनों बाद ही धंसा 26 करोड़ का ओवरब्रिज, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
बक्सर। करोड़ों रुपये की लागत से बने एक नवनिर्मित ओवरब्रिज के उद्घाटन के कुछ दिनों बाद ही धंस जाने से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल निर्माण में भारी अनियमितताएं बरती गईं, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 26 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित इस ओवरब्रिज का हाल ही में उद्घाटन किया गया था। शुक्रवार सुबह पिलर संख्या-5 के समीप सड़क का एक हिस्सा धंस गया। घटना के बाद मौके पर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया है। हालांकि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन लोगों का कहना है कि समय रहते स्थिति का पता नहीं चलता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
आपदा नहीं, भ्रष्टाचार का नतीजा
घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने इसे प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण का परिणाम बताया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई और ठेकेदारों ने अपने लाभ के लिए निर्माण सामग्री में समझौता किया।

निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि पुल निर्माण में उपयोग की गई सरिया और अन्य सामग्री की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं थी। कुछ लोगों ने यहां तक आरोप लगाया कि निर्माण में पुरानी और जंग लगी सरिया का इस्तेमाल किया गया। उनका कहना है कि यदि मानक सामग्री का उपयोग किया गया होता तो पुल उद्घाटन के कुछ दिनों बाद ही क्षतिग्रस्त नहीं होता।

कमीशनखोरी को बताया बड़ी वजह
नागरिकों का कहना है कि सरकारी निर्माण कार्यों में व्याप्त कमीशनखोरी ऐसी घटनाओं की मुख्य वजह है। लोगों के अनुसार, यदि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए तो पुल, सड़क और अन्य परियोजनाओं की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। उनका मानना है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत के कारण जनता को खराब निर्माण कार्यों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
पारदर्शिता बढ़ाने की मांग
स्थानीय निवासियों ने सुझाव दिया कि सभी सरकारी निर्माण कार्यों की निगरानी डिजिटल माध्यम से की जाए और निर्माण प्रक्रिया को सार्वजनिक पोर्टल या लाइव प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि इससे आम जनता भी कार्य की गुणवत्ता पर नजर रख सकेगी और किसी भी अनियमितता की जानकारी समय रहते सामने आ सकेगी।

निर्माण लागत और सामग्री का विवरण सार्वजनिक करने की मांग
लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि पुल निर्माण से संबंधित लागत, उपयोग की जाने वाली सामग्री और तकनीकी मानकों की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं की गई। नागरिकों का कहना है कि प्रत्येक निर्माण स्थल पर विस्तृत सूचना बोर्ड लगाया जाना चाहिए, ताकि जनता को परियोजना की पूरी जानकारी मिल सके।

प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत में अंतर
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर पुल को चालू करने और स्थिति सामान्य होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। उनका आरोप है कि अभी भी आवागमन प्रभावित है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि बिहार में लगातार सामने आ रही पुल-पुलियों के धंसने की घटनाओं को देखते हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
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