देश
पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आक्रोश, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग तेज
प्रयागराज। प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर छात्रों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्रयागराज के सर्किट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विभिन्न छात्र संगठनों और प्रतियोगी छात्रों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। छात्रों ने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाली अनियमितताओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
पेपर लीक से टूट रहा युवाओं का भरोसा
छात्रों का कहना है कि नीट, नेट, एसएससी, लेखपाल, दरोगा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक छात्र ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं का असर केवल छात्रों पर नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार पर पड़ता है। लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य और करियर से जुड़ा यह मुद्दा अब राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुका है।

आंदोलन की चेतावनी
छात्रों ने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली में सुधार और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने जिलास्तर पर छात्रों को संगठित करने और आवश्यकता पड़ने पर विधानसभा तथा संसद तक अपनी आवाज पहुंचाने की बात कही।
केवल फीस लौटाने से समस्या का समाधान नहीं
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि परीक्षा रद्द होने के बाद फीस वापस करना पर्याप्त नहीं है। उनका तर्क है कि तैयारी में लगा समय, आर्थिक संसाधन और मानसिक तनाव किसी भी धनराशि से पूरा नहीं किया जा सकता। कई छात्रों ने यह भी कहा कि बार-बार परीक्षाएं रद्द होने से प्रतियोगियों का मनोबल प्रभावित होता है।
कठोर कानून बनाने की मांग
छात्रों ने पेपर लीक मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि यदि दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी तो इस प्रकार की घटनाएं रुकना मुश्किल है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि परीक्षा में धांधली करने वालों की संपत्ति जब्त करने और उन्हें लंबी अवधि की सजा देने जैसे प्रावधानों पर विचार किया जाए।
स्वतंत्र परीक्षा आयोग की मांग
छात्रों ने सुझाव दिया कि प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन के लिए एक स्वतंत्र और संवैधानिक दर्जा प्राप्त परीक्षा आयोग का गठन किया जाए। उनका मानना है कि इससे परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बन सकेगी तथा बार-बार होने वाली अनियमितताओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
प्रदर्शनकारियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की बढ़ती फीस और शिक्षा के महंगे होते स्वरूप पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी लगातार कठिन होती जा रही है।
सरकार से निष्पक्ष जांच और सुधार की मांग
छात्रों ने सरकार से मांग की कि पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए।
प्रयागराज में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस को तेज कर दिया है। छात्रों का कहना है कि जब तक व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

You must be logged in to post a comment Login