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अस्पताल के बगल में डंपिंग यार्ड, कचरे के ढेर में बचपन तलाशते बच्चे

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पटना। गर्दनीबाग इलाके में स्थित एक डंपिंग यार्ड स्थानीय लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। गर्दनीबाग सरकारी अस्पताल, बापू टावर और वित्त भवन जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के बीच स्थित इस डंपिंग यार्ड में न केवल घरेलू कचरा बल्कि कथित तौर पर मेडिकल वेस्ट भी खुले में पड़ा हुआ है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसी कचरे के ढेर के बीच छोटे-छोटे बच्चे और महिलाएं प्लास्टिक व अन्य सामान चुनकर अपनी जीविका चलाने को मजबूर हैं।

अस्पताल से कुछ ही दूरी पर कचरे का पहाड़

स्थानीय लोगों के अनुसार डंपिंग यार्ड गर्दनीबाग सरकारी अस्पताल की बाउंड्री से महज कुछ दूरी पर स्थित है। यहां नगर निगम की कचरा गाड़ियां नियमित रूप से कचरा गिराती हैं, जिसके कारण पूरे इलाके में तीव्र दुर्गंध फैली रहती है। आसपास से गुजरने वाले लोगों का कहना है कि बिना मास्क या रुमाल के इस रास्ते से गुजरना मुश्किल हो जाता है। इस डंपिंग यार्ड के कारण सर्विस रोड का बड़ा हिस्सा भी प्रभावित हो चुका है, जिससे आम लोगों की आवाजाही में परेशानी हो रही है।

मेडिकल वेस्ट के बीच काम करते बच्चे

डंपिंग यार्ड में कचरा चुनने वाले बच्चों और महिलाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक दिखाई देती है। कई बच्चे बिना जूते-चप्पल और बिना दस्ताने के कचरे के ढेर में प्लास्टिक और अन्य सामग्री खोजते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कचरे में अस्पताल से निकला मेडिकल वेस्ट, इस्तेमाल किए गए ग्लव्स, सलाइन की बोतलें और अन्य चिकित्सकीय सामग्री भी मौजूद रहती है। ऐसे में संक्रमण और गंभीर बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।

पढ़ाई छोड़कर कचरा चुनने को मजबूर बच्चे

डंपिंग यार्ड में काम करने वाली कुछ बच्चियों ने बताया कि आर्थिक मजबूरी के कारण उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी है और परिवार की मदद के लिए कचरा चुनने का काम करती हैं। कई बच्चे प्रतिदिन घंटों तक कचरे के ढेर में काम करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन बच्चों का बचपन शिक्षा और खेलकूद में बीतने के बजाय गंदगी और दुर्गंध के बीच गुजर रहा है, जिससे उनके भविष्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

सुरक्षा उपकरणों का अभाव

कचरा चुनने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें किसी प्रकार के सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते। अधिकांश लोग बिना दस्ताने, मास्क और जूतों के ही काम करते हैं। कई महिलाओं ने बताया कि बदबू और गंदगी की आदत पड़ चुकी है, लेकिन बीमारी का खतरा हमेशा बना रहता है। इसके बावजूद जीविका चलाने के लिए उन्हें इसी वातावरण में काम करना पड़ता है।

नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल

स्थानीय निवासियों ने सवाल उठाया है कि रिहायशी और संवेदनशील क्षेत्र के बीच डंपिंग यार्ड संचालित करने का निर्णय किस आधार पर लिया गया। लोगों का कहना है कि अस्पताल, सरकारी कार्यालयों और आबादी वाले इलाके के बीच इस तरह का कचरा निस्तारण केंद्र सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। निवासियों ने मांग की है कि डंपिंग यार्ड को आबादी वाले क्षेत्र से दूर स्थानांतरित किया जाए और कचरा चुनने वाले बच्चों एवं परिवारों के पुनर्वास और सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मेडिकल वेस्ट और सड़े-गले कचरे के लगातार संपर्क में रहने से संक्रमण, त्वचा रोग, श्वसन संबंधी समस्याएं और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों ने नगर निगम और राज्य सरकार से मांग की है कि डंपिंग यार्ड की व्यवस्था की तत्काल समीक्षा की जाए। साथ ही कचरा चुनने वाले बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष योजना बनाई जाए। क्षेत्रवासियों का कहना है कि विकास और स्वच्छता के नाम पर शहर में कचरा प्रबंधन जरूरी है, लेकिन इसके लिए ऐसी व्यवस्था भी आवश्यक है जिससे आम नागरिकों, खासकर बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

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