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कमरे पर कब्जे के आरोप से नाराज परिवार ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचा पुलिस आयुक्त कार्यालय
वाराणसी। नदेसर क्षेत्र में पुश्तैनी संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद ने सोमवार को अनोखा रूप ले लिया। अपने ही घर के एक कमरे पर कब्जे और पुलिस द्वारा सुनवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए एक परिवार ढोल-नगाड़ों के साथ पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंच गया। परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस और चौकी प्रशासन उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें टालता रहा, जिसके चलते उन्हें प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।

पुश्तैनी मकान के कमरे पर कब्जे का आरोप
परिवार का कहना है कि नदेसर स्थित उनके पुश्तैनी मकान के एक कमरे पर रिश्तेदारों ने ताला लगाकर कब्जा कर लिया है। आरोप है कि परिवार के एक सदस्य ने अपने हिस्से की संपत्ति बेच दी, लेकिन खरीदारों ने उनके हिस्से वाले कमरे पर भी कब्जा कर लिया। विरोध करने पर कमरे में सामान रखकर ताला लगा दिया गया और उन्हें घर से बाहर कर दिया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे केवल अपने हिस्से का कमरा वापस चाहते हैं और पुलिस से ताला खुलवाने की मांग कर रहे हैं।

112 नंबर पर शिकायत के बाद भी नहीं मिली राहत
परिवार के सदस्यों के अनुसार, उन्होंने पहले 112 नंबर पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें चौकी बुलाया गया। परिवार का आरोप है कि चौकी पर पहले उन्हें आश्वासन दिया गया कि ताला खुलवा दिया जाएगा, लेकिन बाद में पुलिस ने अगले दिन आने को कह दिया। परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग की तो पुलिस ने कथित तौर पर उन्हें चालान और जेल भेजने की चेतावनी तक दे दी। इससे निराश होकर पूरा परिवार रातभर सड़क पर रहने को मजबूर हो गया।

बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों के आश्रय का संकट
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने बताया कि घर से बाहर होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। परिवार के बुजुर्गों ने कहा कि जीवन के इस पड़ाव में उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। उनका कहना है कि प्रशासन की उदासीनता के कारण उन्हें न्याय के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा।
पुलिस प्रशासन को जगाने के लिए बजाए ढोल-नगाड़े
अपनी मांगों को लेकर परिवार के सदस्य ढोल-नगाड़ों के साथ पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है तो प्रशासन को जगाने के लिए उन्हें यह अनोखा तरीका अपनाना पड़ा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।
पुलिस और परिवार के बीच हुई तीखी बहस
पुलिस आयुक्त कार्यालय परिसर में नदेसर चौकी प्रभारी भी पहुंचे। इस दौरान परिवार और पुलिस अधिकारियों के बीच बहस की स्थिति बन गई। मीडिया के सामने परिवार के लोगों ने आरोप लगाया कि यदि चौकी स्तर पर उनकी समस्या का समाधान हो सकता था तो उन्हें पुलिस आयुक्त कार्यालय तक आने की जरूरत नहीं पड़ती।
वहीं चौकी प्रभारी ने मामले को चौकी स्तर पर ही सुलझाने की बात कही और संबंधित पक्षों को बातचीत के लिए बुलाया।
पुलिस आयुक्त कार्यालय से मिला कार्रवाई का आश्वासन
प्रदर्शन के बाद परिवार के प्रतिनिधियों ने पुलिस आयुक्त कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। परिवार का दावा है कि अधिकारियों ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। साथ ही उनके हिस्से के कमरे को कब्जा मुक्त कराने और विवाद का समाधान कराने का भरोसा भी दिलाया गया है।
यह मामला न केवल पुश्तैनी संपत्ति विवाद का है, बल्कि स्थानीय स्तर पर शिकायतों के निस्तारण और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। परिवार का कहना है कि यदि प्रारंभिक स्तर पर उनकी शिकायत पर कार्रवाई होती तो उन्हें ढोल-नगाड़ों के साथ प्रदर्शन करने और पुलिस आयुक्त कार्यालय का दरवाजा खटखटाने की जरूरत नहीं पड़ती।
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