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प्यासे गांव तक पहुंचा पानी, लेकिन सड़क और स्कूल अब भी बदहाल

मध्य प्रदेश के शहडोल जिला की ब्यौहारी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत धाधुंकुई के आदिवासी बहुल ग्राम दाल में मूलभूत सुविधाओं की बदहाली को लेकर प्रकाशित बतंगड़ रिपोर्टर की खबर का असर आखिरकार दिखाई दिया। खबर सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया और गांव में पेयजल व्यवस्था बहाल कर दी गई। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि अभी भी गांव की सड़क और स्कूल जैसी जरूरी समस्याओं पर कोई ठोस ध्यान नहीं दिया गया है।

खबर के बाद हरकत में आया प्रशासन

वर्षों से खराब पड़े हैंडपंप की हुई मरम्मत

कुछ समय पहले “बतंगड़ रिपोर्टर” ने ग्राम धाधुंकुई की जमीनी हकीकत को प्रमुखता से उठाया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि गांव में केवल एक हैंडपंप था, जो लंबे समय से खराब पड़ा हुआ था। इसके कारण ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर पन्ना धाम क्षेत्र के झरने और कुंड से पानी लाना पड़ रहा था।

यह रास्ता बेहद खतरनाक था, जहां छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को पथरीली खाई और जंगल के बीच से गुजरना पड़ता था। ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें कीं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा था।

जंगल के बीच पानी के लिए संघर्ष

ग्रामीणों ने बताया था कि जिस झरने और कुंड के पानी पर पूरा गांव निर्भर था, वहीं जंगली जानवर भी पानी पीने आते थे। क्षेत्र में हाथियों और भालुओं की मौजूदगी लगातार ग्रामीणों के लिए खतरा बनी हुई थी।
हर दिन पानी लाने के लिए गांव की महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को जान जोखिम में डालकर जंगल के रास्तों से गुजरना पड़ता था। गर्मी के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते थे।

खबर का असर, गांव तक पहुंचा पानी

बतंगड़ रिपोर्टर में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक अमला गांव पहुंचा और खराब पड़े हैंडपंप की मरम्मत कराई गई। साथ ही गांव में अतिरिक्त पेयजल व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। ग्रामीणों ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि अब उन्हें पानी के लिए जंगल और खतरनाक रास्तों का सहारा नहीं लेना पड़ रहा है। गांव के लोगों ने उम्मीद जताई है कि अब प्रशासन उनकी अन्य समस्याओं की ओर भी ध्यान देगा।

सड़क और स्कूल की हालत अब भी खराब

हालांकि गांव की सभी समस्याएं अभी खत्म नहीं हुई हैं। गांव तक पहुंचने वाली सड़क आज भी कच्ची और जर्जर बनी हुई है। बरसात के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं, जिससे गांव का संपर्क कई बार टूट जाता है।
वहीं गांव के स्कूल की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। बच्चों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं और भवन की हालत भी सुधार की मांग कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के बिना गांव का विकास अधूरा है।

सड़क और स्कूल पर भी ध्यान दे प्रशासन

ग्रामीणों का कहना है कि पानी की समस्या का समाधान होना राहत जरूर है, लेकिन विकास की असली तस्वीर तब बदलेगी जब गांव को सड़क, शिक्षा, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी मिलेंगी।
उन्होंने शासन-प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि अब गांव की सड़क और स्कूल की ओर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाए, ताकि आदिवासी बहुल इस गांव के लोगों को बेहतर जीवन मिल सके।

पत्रकारिता बनी बदलाव की वजह

बतंगड़ रिपोर्टर की इस खबर ने एक बार फिर यह साबित किया है कि यदि पत्रकारिता जमीनी मुद्दों को ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ उठाए, तो वह बदलाव की बड़ी वजह बन सकती है। ग्राम दाल में पानी की व्यवस्था बहाल होना इसी का एक उदाहरण माना जा रहा है।

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