देश
ब्लास्टिंग, धूल और बेरोजगारी के बीच घुट रही सांसें, पीपलिया गदिया के ग्रामीणों ने सीमेंट माइंस पर लगाए गंभीर आरोप
चित्तौड़गढ़। जिले के निंबाहेड़ा उपखंड के पीपलिया गदिया गांव में संचालित सीमेंट माइंस और ब्लास्टिंग को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। गांव के लोगों का आरोप है कि वर्षों से हो रही खनन गतिविधियों और रोजाना होने वाली ब्लास्टिंग के कारण उनका जीवन संकट में आ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उड़ती धूल, जहरीली गैस और भारी वाहनों की आवाजाही ने न केवल खेती और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और आजीविका पर भी गंभीर असर डाला है।

ब्लास्टिंग से कांपते घर, उड़ती धूल से बर्बाद हो रही खेती
ग्रामीणों के अनुसार दोपहर के समय नियमित रूप से होने वाली ब्लास्टिंग से पूरा गांव दहल उठता है। कई मकानों में दरारें पड़ गई हैं और कंपन इतना तेज होता है कि घरों में रखा सामान तक हिलने लगता है। किसानों का आरोप है कि खदानों से उड़ने वाली धूल फसलों पर जम जाती है, जिससे उत्पादन लगातार घट रहा है। पशु भी धूल से ढकी घास खाने से बीमार पड़ रहे हैं।

प्रदूषण से बढ़ रही बीमारियां
ग्रामीणों का कहना है कि खदानों से निकलने वाली धूल और गैस के कारण गांव में सांस संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। लोगों को खांसी, गले में संक्रमण, आंखों में जलन और फेफड़ों की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका दावा है कि सुबह तक पानी की सतह पर भी धूल और प्रदूषण की परत दिखाई देती है।
जमीन गई, रोजगार नहीं मिला
कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनकी कृषि भूमि अधिग्रहित की गई, लेकिन बदले में स्थायी रोजगार का वादा पूरा नहीं हुआ। कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें उचित मुआवजा भी नहीं मिला और रोजगार के नाम पर केवल आश्वासन दिए गए। उनका आरोप है कि स्थानीय युवाओं की बजाय बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि गांव के शिक्षित युवा बेरोजगार घूम रहे हैं।

मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव
ग्रामीणों का कहना है कि खनन क्षेत्र से सटे गांव में आज भी सड़क, पेयजल और पर्याप्त शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। गांव में केवल पांचवीं तक विद्यालय है, जिसके बाद बच्चों को दूसरे गांव जाना पड़ता है। खराब सड़क और फैक्ट्री से निकलने वाले पानी के कारण बरसात में बच्चों का स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी उठाए सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और संबंधित अधिकारी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो प्रदूषण पर प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही रोजगार व विकास के वादे पूरे किए गए।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने खनन गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण और ब्लास्टिंग की स्वतंत्र जांच कराने, प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने तथा गांव में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
कंपनी और प्रशासन का पक्ष आना बाकी
ग्रामीणों ने सीमेंट कंपनी और प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि समाचार लिखे जाने तक कंपनी और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
-
देश12 months agoसत्ता, पैसा और अंधविश्वास – बाबा इंडस्ट्री की असली कहानी
-
देश12 months agoन्याय के लिए डंडा खाती मां! 🚨 ममता सरकार पर सवाल | Kolkata Case
-
Blog12 months agoBageshwar Baba Exposed? 😱 Miracle ✨ या Illusion 🎭
-
एजुकेशन12 months agoखमरिया गांव की शिक्षा पर संकट: ताले में बंद प्राथमिक शाला और मधुशाला बनी माध्यमिक शाला

You must be logged in to post a comment Login