बतंगड़ स्पेशल
क्या भारत का लोकतंत्र अब सिर्फ दिखावा बन गया है?
हम हर पाँच साल में वोट डालते हैं, इस उम्मीद के साथ कि देश के हालात सुधरेंगे। लेकिन सच्चाई? हालात बेहतर होने की बजाय और बिगड़ते जा रहे हैं।
चुनाव जीतने के लिए करोड़ों के स्कैम, वोटर लिस्ट में हेराफेरी, EVM विवाद, और नेताओं-अफसरों की साठगांठ — ये सब अब ‘नॉर्मल’ बन चुका है। ये खेल सिर्फ चुनाव के वक्त ही नहीं, बल्कि पूरे कार्यकाल में चलता है — चाहे वो घोटाले हों, एजेंसियों का दुरुपयोग, या जनता के पैसों की लूट।
सवाल है — आखिर कब तक हम इस सिस्टम के गुलाम बने रहेंगे?
क्या भारत का लोकतंत्र अब सिर्फ एक दिखावा रह गया है?
हाल ही में हरियाणा के पानीपत पंचायत चुनाव में, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुए EVM पुनर्गणना के बाद नतीजे पलट गए। मोहित कुमार, जो पहले हार चुके थे, गिनती के बाद विजेता घोषित हुए। इस घटना ने मशीनों की विश्वसनीयता और अफसरशाही की निष्पक्षता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए।
विपक्षी दल, खासकर राहुल गांधी और अखिलेश यादव, लगातार आरोप लगा रहे हैं कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी, EVM में छेड़छाड़ और राजनीतिक कब्ज़ा लोकतंत्र के मूल को खत्म कर रहे हैं। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग से पारदर्शिता की दिशा में कदम उठाने को कहा है।
लेकिन असली समस्या सिर्फ मशीनें नहीं हैं — ये पूरा सिस्टम है।
सीनियर पत्रकारों का मानना है कि अफसर और नेता की साठगांठ ही सबसे बड़ा खतरा है। जब कई विकसित देशों ने EVM पर रोक लगा दी है, तो भारत में इन पर आंख मूंदकर भरोसा क्यों किया जा रहा है?
कांग्रेस का दावा है कि 25 लोकसभा सीटों पर बीजेपी की जीत का अंतर 35,000 वोट से भी कम था, और इन्हीं जगहों पर धांधली हुई। प्रधानमंत्री की बनारस सीट पर भी शुरुआती रुझानों में पीछे रहने के बाद अचानक जीत दर्ज होना सवाल खड़े करता है।
अब विपक्ष मांग कर रहा है कि —
- अगला चुनाव सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो।
- चुनाव आयोग को राजनीतिक दखल से मुक्त किया जाए।
- हर वोट का ऑडिट हो।
- दोषियों पर सख्त और समयबद्ध कार्रवाही हो।
आज भारत उस मोड़ पर खड़ा है, जहां लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन बाहर नहीं, अंदर बैठा है। अगर अब भी हम नहीं जागे, तो अगला चुनाव जनता का जनादेश नहीं बल्कि किसी सिस्टम की स्क्रिप्ट होगा।
आपकी राय?
क्या भारत का लोकतंत्र खतरे में है?
कमेंट्स में बताइए और सोशल मीडिया पर #लोकतंत्र_की_सच्चाई के साथ अपनी आवाज़ उठाइए।
जय हिंद।
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