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पेपर लीक के आरोपों के बीच बिहार दरोगा भर्ती पर बवाल
पटना। प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश एक बार फिर सड़क पर दिखाई दिया। 1799 पदों वाली बिहार पुलिस दरोगा भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक और धांधली के आरोपों को लेकर अभ्यर्थियों ने गर्दनीबाग धरना स्थल पर प्रदर्शन किया। छात्रों ने परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
पेपर लीक के आरोपों पर सवाल
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परीक्षा में धांधली से जुड़े सबूत सामने आने के बावजूद आयोग ने प्रक्रिया आगे बढ़ाई। छात्रों का कहना है कि यदि किसी परीक्षा में अनियमितता की पुष्टि होती है तो उसे रद्द कर निष्पक्ष तरीके से दोबारा कराया जाना चाहिए। अभ्यर्थियों ने यह भी सवाल उठाया कि अन्य परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के बाद परीक्षा रद्द की गई, तो दरोगा भर्ती परीक्षा में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा। हालांकि, पेपर लीक और धांधली के आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही होगी।
OMR और आंसर-की सार्वजनिक करने की मांग

छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि परीक्षा समाप्त होने के बाद अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र, ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी और समय पर आंसर-की उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे अभ्यर्थी अपने प्रदर्शन का मिलान कर सकेंगे और परिणाम प्रक्रिया पर भरोसा बढ़ेगा।
अधिकारियों की जवाबदेही की मांग
प्रदर्शनकारियों ने आयोग के चेयरमैन और संबंधित अधिकारियों के इस्तीफे की मांग की। उनका कहना है कि आयोग की जिम्मेदारी सिर्फ परीक्षा आयोजित करना नहीं, बल्कि उसे निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराना भी है। कुछ छात्रों ने आयोग के अधिकारियों की भूमिका की जांच और कथित भ्रष्टाचार के मामलों में उनकी संपत्ति की जांच की मांग भी उठाई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पढ़ाई छोड़ सड़क पर उतरे छात्र
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे महीनों और वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। परीक्षा में कथित अनियमितता के बाद उनकी मेहनत और भविष्य दोनों प्रभावित होते हैं। प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं ने कहा कि उन्हें लाइब्रेरी में पढ़ना चाहिए था, लेकिन व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है।
अब जांच और फैसले का इंतजार
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि 1799 पदों वाली दरोगा भर्ती परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराया जाए। साथ ही कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। मामला अब सिर्फ एक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं है। यह प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, जवाबदेही और अभ्यर्थियों के भरोसे से जुड़ा सवाल बन चुका है।

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