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हाईटेक नोएडा में पानी को तरसती 500 से ज्यादा झुग्गियां
नोएडा। देश के हाईटेक शहरों में गिने जाने वाले नोएडा से विकास के दावों पर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर सामने आई है। सेक्टर-78 की झुग्गी बस्ती में रहने वाले सैकड़ों परिवार पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां 500 से ज्यादा झुग्गियां हैं, जिनमें हजारों लोग रहते हैं।
हालात ऐसे हैं कि कुछ परिवार बारिश का पानी जमा कर उसका इस्तेमाल पीने और घरेलू कामों के लिए करने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि पहले नाले के पास से पानी लाकर किसी तरह गुजारा करते थे। स्थानीय लोगों ने नाले में एक बच्ची के गिरने और 12 वर्षीय बच्चे की मौत का भी दावा किया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
पाइप हटाया, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं

स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ समय पहले बस्ती के पास एक पाइप से पानी मिल रहा था। लोग वहीं से पानी भरते थे। हाल ही में अधिकारियों की कार्रवाई के बाद पाइप हटा दिया गया और पानी बंद हो गया। लोगों का सवाल है कि अगर पाइप हटाना जरूरी था तो वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था क्यों नहीं की गई? एक महिला ने बताया कि पानी खरीदने के लिए रोजाना पैसे खर्च करने पड़ते हैं। गरीब परिवारों के सामने सवाल है कि बच्चों का पेट पालें या पानी खरीदें।
बारिश का पानी बना सहारा

बस्ती में जमा बारिश के पानी की तस्वीरें हालात की गंभीरता दिखाती हैं। लोगों का कहना है कि पैसे नहीं होने पर इसी पानी का इस्तेमाल करना पड़ता है। दूषित पानी पीने से बीमारी का खतरा भी बना हुआ है। पानी के साथ बिजली की समस्या भी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि कई दिनों से बिजली आपूर्ति प्रभावित है। गर्मी में बिजली नहीं होने से बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।
एक तरफ हाईटेक इमारतें, दूसरी तरफ पानी के लिए संघर्ष
सेक्टर-78 की तस्वीर नोएडा के दो अलग-अलग चेहरों को दिखाती है। एक तरफ ऊंची इमारतें और आधुनिक सुविधाएं हैं, तो दूसरी तरफ उन्हीं के बीच झुग्गियों में रहने वाले परिवार पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, 500 से ज्यादा झुग्गियों में करीब दो हजार या उससे अधिक लोग रह सकते हैं। ऐसे में स्थायी पेयजल व्यवस्था का अभाव गंभीर समस्या है।
प्रशासन के सामने बड़ा सवाल
पाइपलाइन पर कार्रवाई करना प्रशासनिक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन उसके बाद प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक पानी की व्यवस्था करना भी जरूरी है। सवाल यही है कि सेक्टर-78 के इन परिवारों को पानी के लिए कब तक संघर्ष करना पड़ेगा और प्रशासन इनके लिए स्थायी पेयजल व्यवस्था कब करेगा?

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