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राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के खिलाफ छात्रों का हल्लाबोल, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई
नई दिल्ली। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के खिलाफ छात्रों का गुस्सा एक बार फिर सड़क पर दिखाई दिया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा में अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र के पेपर रद्द किए जाने के विरोध में छात्रों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था में लगातार गड़बड़ियों और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए एजेंसी को खत्म करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें जबरन हटाया और कुछ छात्रों के साथ धक्का-मुक्की की। वीडियो में पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों को बसों में ले जाते हुए देखा गया।
पेपर की गलती हमारी नहीं, फिर सजा हमें क्यों?
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वे महीनों और वर्षों की तैयारी के बाद परीक्षा देते हैं। अगर परीक्षा में गड़बड़ी के कारण पेपर रद्द होता है, तो दोबारा तैयारी का बोझ भी छात्रों पर ही पड़ता है।
छात्रों का सवाल है कि सिर्फ दोबारा परीक्षा के लिए पंजीकरण शुल्क नहीं लेने से उनकी परेशानी खत्म नहीं हो जाती। परीक्षा केंद्र तक पहुंचने का खर्च, दोबारा तैयारी में लगने वाला समय और मानसिक दबाव की जिम्मेदारी कौन लेगा?
एक प्रदर्शनकारी ने सवाल उठाया कि छात्रों की छोटी गलती पर सख्ती होती है, लेकिन परीक्षा व्यवस्था की बड़ी गड़बड़ियों की जवाबदेही कब तय होगी?

तीन पेपर रद्द होने से बढ़ा विवाद
अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र के पेपर रद्द होने के बाद दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया है। छात्रों का कहना है कि बार-बार पेपर रद्द होने से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने, जवाबदेही तय करने और परीक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान कई छात्र हिरासत में
प्रदर्शन बढ़ने के बाद पुलिस ने छात्रों को वहां से हटाना शुरू किया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार कई छात्रों को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया गया। छात्रों ने पुलिस पर धक्का-मुक्की और बल प्रयोग का आरोप लगाया।
छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखने आए थे और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के अधिकारियों से बातचीत चाहते थे।

छात्रों की प्रमुख मांगें
- राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली की समीक्षा और उसे खत्म करने की मांग।
- परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
- रद्द पेपरों के अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा के लिए पर्याप्त समय मिले।
- छात्रों को होने वाले आर्थिक और मानसिक नुकसान की भरपाई की जाए।
- परीक्षा में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।
अब सवाल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी से
छात्रों का सवाल सीधा है—अगर परीक्षा में गलती छात्रों की नहीं है, तो उसका खामियाजा बार-बार छात्र ही क्यों भुगतें?
एक तरफ सालों की मेहनत और तैयारी है, दूसरी तरफ पेपर रद्द होने पर फिर उसी प्रक्रिया से गुजरने की मजबूरी।
अब देखना होगा कि सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी छात्रों की इन शिकायतों पर क्या जवाब देती है। छात्रों का कहना है कि जब तक परीक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार और जवाबदेही तय नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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