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चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का भोपाल में प्रदर्शन, नियुक्ति की मांग पर अड़े
भोपाल। मध्य प्रदेश में वर्ग-3 शिक्षक भर्ती से जुड़े चयनित अभ्यर्थियों का विरोध-प्रदर्शन सोमवार को राजधानी भोपाल में तेज हो गया। नियुक्ति की मांग को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शिवाजी नगर क्षेत्र में जुटे और अपने अधिकारों के समर्थन में मार्च निकालने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान जारी नियमों में दस्तावेज सत्यापन तक निर्धारित योग्यता पूरी करने का प्रावधान था, लेकिन बाद में एक निश्चित तारीख तक की डिग्री को अनिवार्य मानते हुए कई अभ्यर्थियों को अपात्र घोषित कर दिया गया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे चयन परीक्षा के दोनों चरणों में सफल होने के बाद दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया तक पहुंच चुके थे। इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति से बाहर किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि भर्ती के आवेदन में दिए गए क्लॉज/रूल 49 को ही आधार मानते हुए उन्हें नियुक्ति दी जाए।
20 जुलाई से लगातार कर रहे प्रदर्शन
प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों ने बताया कि वे पिछले कई दिनों से भोपाल आकर अधिकारियों से मुलाकात और अपनी मांग रखने की कोशिश कर रहे हैं। इंदौर से आई एक अभ्यर्थी ने कहा कि 20 जुलाई से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है। उनका आरोप है कि जिस नियम के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है, उस पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा।
अलीराजपुर, झाबुआ, छिंदवाड़ा, इंदौर और अन्य जिलों के साथ राजस्थान से भी अभ्यर्थियों के भोपाल पहुंचने की बात सामने आई। कुछ अभ्यर्थियों ने दावा किया कि वे कई दिनों से राजधानी में रहकर अपनी मांग उठा रहे हैं।
दस्तावेज की तारीख को लेकर विवाद
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, भर्ती में विशेष शिक्षकों के पद भी शामिल थे और बड़ी संख्या में पदों पर भर्ती की प्रक्रिया हुई। अभ्यर्थियों का दावा है कि उनके दस्तावेज वैध हैं, लेकिन निर्धारित कटऑफ तारीख से पहले दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के आधार पर उन्हें अपात्र घोषित किया गया।
एक अभ्यर्थी ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया के दौरान रूल-49 में दस्तावेज सत्यापन के समय आवश्यक योग्यता पूरी होने की बात कही गई थी। उनका आरोप है कि अब उसी प्रावधान को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। अभ्यर्थियों की मांग है कि दस्तावेज सत्यापन तक उपलब्ध योग्यता को मान्य किया जाए और उन्हें नियुक्ति का अवसर दिया जाए।
डीपीआई कार्यालय पहुंचने पर नहीं मिली अनुमति
अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि वे लोक शिक्षण संचालनालय कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहां बैठकर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से बातचीत की कोशिश भी की गई, लेकिन उनकी मुख्य मांग पर स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
इसके बाद अभ्यर्थियों ने आगे बढ़कर अधिकारियों से मिलने का प्रयास किया, जहां पुलिस ने उन्हें रोक दिया। मौके पर पुलिस बल और पुलिस वाहन की मौजूदगी को लेकर प्रदर्शनकारियों ने नाराजगी जताई।
‘रोजगार देने की बात, लेकिन चयनितों को नियुक्ति क्यों नहीं?’
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से सवाल किया कि जब सरकार लगातार रोजगार देने की बात कर रही है और अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं, तो उन्हें नियुक्ति क्यों नहीं दी जा रही। अभ्यर्थियों ने कहा कि उनकी मांग किसी नए नियम या अतिरिक्त लाभ की नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पहले से निर्धारित नियमों को लागू करने की है।
कुछ अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि अपनी मांग रखने के लिए उन्हें सड़क पर बैठना और मार्च निकालना पड़ रहा है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की कोशिश के बावजूद प्रशासन की ओर से उन्हें आगे बढ़ने से रोका जा रहा है।
नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग
अभ्यर्थियों ने मध्य प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से पूरे मामले में स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भर्ती नियमों में रूल-49 के तहत दस्तावेज सत्यापन तक योग्यता पूरी करने का प्रावधान था, तो उसी आधार पर उनकी पात्रता पर विचार किया जाना चाहिए।
फिलहाल चयनित शिक्षक अभ्यर्थी अपनी मांग पर कायम हैं और नियुक्ति पत्र जारी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। वहीं, प्रदर्शन के दौरान पुलिस की तैनाती और अभ्यर्थियों को रोके जाने से मामला प्रशासनिक कार्रवाई और अभ्यर्थियों के अधिकारों के बीच एक बड़े सवाल के रूप में सामने आया है।

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