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आजादपुर मंडी में गंदगी का अंबार, कीचड़ और जाम सीवर के बीच बिक रही सब्जियां

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नई दिल्ली। देश की प्रमुख सब्जी मंडियों में शुमार आजादपुर मंडी से रोजाना बड़ी मात्रा में सब्जियां दिल्ली-एनसीआर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचती हैं। लेकिन जिस मंडी से लोगों की रसोई तक सब्जियां पहुंचती हैं, वहां की बदहाल सफाई व्यवस्था खाद्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। मंडी परिसर में जगह-जगह कूड़े के ढेर, कीचड़, जलभराव, जाम सीवर और दुर्गंध के बीच सब्जियों की खरीद-बिक्री होती नजर आई।

सड़क में गड्ढे या गड्ढे में सड़क?

मंडी के कई हिस्सों में सड़क की हालत बेहद खराब दिखाई दी। जगह-जगह गड्ढे और मलबा होने के कारण पैदल चलने वालों, मजदूरों और सब्जी लेकर आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। भारी सामान उठाकर चलने वाले मजदूरों के लिए फिसलने और गिरने का खतरा और बढ़ जाता है।
मंडी में वाहनों की आवाजाही के बीच कई जगह रास्ते संकरे नजर आए। ट्रकों के आने पर जाम की स्थिति बनती है और लोगों को कीचड़ तथा मलबे से होकर गुजरना पड़ता है।

कचरे और कीचड़ के बीच सब्जियों की बिक्री

मंडी के कई हिस्सों में कचरा खुले में पड़ा दिखाई दिया। कुछ जगहों पर सब्जी बेचने वाले छोटे विक्रेता इसी गंदगी और कीचड़ के बीच बैठकर अपना कारोबार करते नजर आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई नियमित रूप से होने के बावजूद कुछ ही समय में दोबारा कचरा फैल जाता है।
एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि मंडी में काम करने वाले गरीब मजदूरों के सामने मजबूरी है। उनका कहना है कि रोजी-रोटी चलाने के लिए उन्हें खराब परिस्थितियों में भी काम करना पड़ता है।

मजबूरी में सब्जी खरीदनी पड़ती है

मंडी में आने वाले कुछ खरीदारों ने भी सफाई व्यवस्था पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि इतनी गंदगी के बीच सब्जियां खरीदना चिंता का विषय है, लेकिन महंगाई और जरूरत के कारण उन्हें खरीदारी करनी ही पड़ती है।

एक खरीदार ने कहा कि वह लंबे समय से मंडी में आ रहा है और उसे यहां की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आता। उसके मुताबिक, गंदगी के बावजूद गरीब और आम लोगों को यहां से सब्जियां लेकर जाना पड़ता है।

जाम सीवर और बारिश में जलभराव

स्थानीय लोगों के मुताबिक मंडी के कई हिस्सों में सीवर व्यवस्था भी खराब है। बारिश के दौरान पानी जमा हो जाता है और लंबे समय तक निकल नहीं पाता। मंडी में खुले में पड़ा कचरा सीवर तक पहुंचने के कारण जल निकासी की समस्या और गंभीर होने की बात भी सामने आई।

मंडी के आसपास रहने और काम करने वाले लोगों का कहना है कि बारिश के दिनों में कीचड़ और पानी के कारण हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं।

सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल

मंडी में सफाई को लेकर अलग-अलग लोगों के अलग-अलग दावे सामने आए। कुछ लोगों का कहना था कि सफाई रोज होती है, लेकिन कचरा दोबारा फैल जाता है। वहीं कुछ स्थानीय लोगों ने सफाई व्यवस्था को अपर्याप्त बताया।

मंडी में मौजूद लोगों का सवाल है कि अगर नियमित सफाई की व्यवस्था है, तो जगह-जगह इतना कचरा और कीचड़ क्यों नजर आ रहा है? आखिर सफाई के बाद कचरे का उचित निस्तारण क्यों नहीं हो रहा?

सफाई के लिए जिम्मेदार व्यवस्था पर भी सवाल

मंडी की सफाई व्यवस्था को लेकर एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी यानी एपीएमसी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कारोबारियों से मंडी में विभिन्न शुल्क लिए जाते हैं और इसके बदले बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित व्यवस्था की होती है।

ऐसे में सवाल यह है कि जब मंडी में सफाई और रखरखाव के लिए व्यवस्था मौजूद है, तो फिर कचरे के ढेर, जाम सीवर, कीचड़ और जलभराव की समस्या क्यों बनी हुई है?

खाद्य सुरक्षा के दावों के बीच बड़ा सवाल

आजादपुर मंडी से निकलने वाली सब्जियां दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों तक पहुंचती हैं। ऐसे में मंडी की स्वच्छता केवल व्यापारियों और मजदूरों का मुद्दा नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा विषय भी है।

हालांकि, केवल मंडी की गंदगी देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि वहां बिकने वाली हर सब्जी असुरक्षित है। लेकिन खुले कचरे, गंदे पानी, कीचड़ और खराब जल निकासी जैसी परिस्थितियां निश्चित तौर पर स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।

अब सवाल यही है कि देश की इतनी महत्वपूर्ण सब्जी मंडी में साफ-सफाई और जल निकासी की व्यवस्था कब सुधरेगी? और क्या जिम्मेदार एजेंसियां सिर्फ सफाई होने का दावा करेंगी या जमीन पर भी इसका असर दिखाई देगा?

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