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‘कॉकरोच’ टिप्पणी पर भड़के अभ्यर्थी, जंतर-मंतर पर सरकार के खिलाफ बुलंद की आवाज़

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर विभिन्न राज्यों से पहुंचे अभ्यर्थियों और युवाओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि युवाओं की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार गंभीर नहीं है। उनका कहना था कि जब युवाओं को “कॉकरोच” जैसे शब्दों से संबोधित किया जाता है तो इससे उनकी भावनाएं आहत होती हैं और इसी का विरोध करने के लिए देशभर से छात्र एकजुट हुए हैं।

युवाओं की ताकत अब सरकार को महसूस हो रही

प्रदर्शन में शामिल एक छात्र नेता ने कहा कि युवाओं के भीतर हमेशा से ताकत थी, लेकिन अब उन्हें अपनी सामूहिक शक्ति का एहसास हुआ है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र जंतर-मंतर पहुंचे हैं और सरकार से जवाब मांग रहे हैं।

आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि देश में जब भी कोई जनआंदोलन होता है, उसे अलग-अलग नाम देकर बदनाम करने की कोशिश की जाती है। उनका कहना था कि किसानों के आंदोलन को लेकर भी सवाल उठाए गए और छात्रों के आंदोलनों को भी राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को इन मुद्दों से ध्यान भटकाने के बजाय शिक्षा और रोजगार जैसे मूल प्रश्नों पर बात करनी चाहिए।

सरकार जनता की आवाज नहीं सुन रही

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पिछले एक महीने से लगातार आंदोलन के बावजूद सरकार उनकी मांगों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही है। उनका कहना था कि देशभर से समर्थन मिलने के बाद भी सरकार चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।

थाली-चम्मच बजाकर जताया विरोध

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने थाली और चम्मच बजाकर विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि कोरोना महामारी के दौरान जिस प्रतीकात्मक तरीके को अपनाने की अपील की गई थी, उसी तरीके से अब वे सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता बताई।

डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का किया उल्लेख

प्रदर्शनकारियों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर और उनके विचारों वाले पोस्टर भी हाथों में लिए। उनका कहना था कि देश के युवाओं को मुफ्त राशन देने के बजाय गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा उपलब्ध कराना अधिक जरूरी है। उन्होंने अंबेडकर के शिक्षा संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए सरकार से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की।

सेलिब्रिटीज की चुप्पी पर भी उठाए सवाल

कुछ प्रदर्शनकारियों ने फिल्मी हस्तियों और क्रिकेटरों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि समाज के प्रभावशाली लोगों को युवाओं के मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखनी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने विपक्ष और सत्ता पक्ष के कई नेताओं पर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पहले जो नेता छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर खुलकर बोलते थे, वे अब चुप हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

रोजगार और शिक्षा बने राजनीति का केंद्र

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देश की राजनीति में शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका आरोप था कि राजनीतिक दल अक्सर अन्य विषयों पर बहस कराते हैं, जबकि युवाओं के भविष्य से जुड़े प्रश्न पीछे छूट जाते हैं। उत्तराखंड सहित कई राज्यों से पहुंचे छात्रों ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती है तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।

रातभर धरने पर डटे रहे छात्र

भीषण गर्मी और देर रात तक प्रदर्शन के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र जंतर-मंतर पर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे तब तक आंदोलन जारी रखेंगे, जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती। वहीं, उनकी प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर बनी हुई है।

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