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बाढ़ रेलवे स्टेशन की बदहाल व्यवस्था से यात्री परेशान, 6 महीने से बंद पेयजल और गंदगी का अंबार

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पटना। यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए बाढ़ रेलवे स्टेशन की स्थिति इन दिनों बद से बदतर होती जा रही है। भीषण गर्मी के बीच स्टेशन परिसर में पेयजल की व्यवस्था ठप है, शौचालय गंदगी से भरे पड़े हैं और यात्रियों के बैठने की सीटें टूट चुकी हैं। स्थानीय यात्रियों और रेलवे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लोगों का आरोप है कि पिछले छह महीनों से समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं, लेकिन रेलवे प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।

पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे यात्री

स्टेशन पर लगे अधिकांश पेयजल नल बंद पड़े हैं। यात्रियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में प्यास लगने पर उन्हें मजबूरन 15 से 20 रुपये खर्च कर बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है। नियमित सफर करने वाले यात्रियों के अनुसार कई बार स्टेशन पर उपलब्ध पानी की व्यवस्था पूरी तरह ठप रहती है, जिससे गरीब और जरूरतमंद यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। एक यात्री ने कहा कि यदि किसी के पास पानी खरीदने के पैसे न हों तो उसे प्यासा ही रहना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया।

छह माह से नहीं हुआ समस्या का समाधान

प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लोगों का कहना है कि स्टेशन पर पानी की समस्या कोई नई नहीं है। पिछले छह महीनों से लगातार यह स्थिति बनी हुई है। उनका दावा है कि नया पंप भी लगाया गया है, लेकिन उसमें अब तक कनेक्शन नहीं किया गया, जिसके कारण वह उपयोग में नहीं आ पा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद रेलवे अधिकारियों द्वारा केवल आश्वासन दिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई दिखाई नहीं देती।

शौचालयों में गंदगी, सफाई व्यवस्था पर सवाल

स्टेशन परिसर के शौचालयों की स्थिति भी बेहद खराब बताई जा रही है। शौचालयों में कचरा फैला हुआ है और नियमित सफाई नहीं होने के कारण दुर्गंध का वातावरण बना रहता है। यात्रियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में शौचालयों का उपयोग करना भी मुश्किल हो गया है।
यात्रियों ने सवाल उठाया कि जब स्टेशन पर रोजाना हजारों लोग आते-जाते हैं, तब भी सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जा रही है।

टूटी सीटें और बदहाल बुनियादी सुविधाएं

स्टेशन पर यात्रियों के बैठने के लिए लगाई गई कई सीटें टूट चुकी हैं। यात्रियों का कहना है कि न तो उनकी मरम्मत कराई जा रही है और न ही नई व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा कई स्थानों पर पंखे भी लंबे समय तक खराब रहते हैं, जिससे गर्मी के दिनों में यात्रियों को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ती है।

रेलवे प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि स्टेशन के विकास और रखरखाव के लिए नियमित रूप से बजट और फंड जारी किए जाते हैं, तो उनकी उपयोगिता जमीनी स्तर पर दिखाई क्यों नहीं देती। लोगों का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं की ऐसी स्थिति रेलवे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

यात्रियों ने की त्वरित कार्रवाई की मांग

स्थानीय यात्रियों और प्लेटफॉर्म कर्मियों ने रेलवे प्रशासन से स्टेशन की पेयजल व्यवस्था तत्काल बहाल करने, शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने, टूटी सीटों की मरम्मत कराने तथा स्टेशन परिसर में स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो यात्रियों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। गर्मी के इस मौसम में बाढ़ रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं का अभाव यात्रियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें रेलवे प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर इन समस्याओं का समाधान कब तक हो पाता है।

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